छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था अब बड़े बदलाव की ओर है। रूआबांधा में आयोजित संभागीय समीक्षा बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार ने स्पष्ट कर दिया कि भविष्य की खेती अब ‘स्मार्ट और टिकाऊ’ होगी। इस बैठक में संभाग आयुक्त एस.एन. राठौर और कलेक्टर अभिजीत सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
ई-उर्वरक प्रणाली- बिना पंजीयन नहीं मिलेगी खाद
आगामी खरीफ सीजन से उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने जा रही है। नई ई-उर्वरक प्रणाली के तहत अब केवल उन्हीं किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाएगी, जिनका पंजीयन एग्रीस्टेक पोर्टल पर होगा। खाद की मात्रा भी खेत के रकबे और फसल के आधार पर सॉफ्टवेयर ही तय करेगा। आयुक्त ने सभी कलेक्टर्स को शत-प्रतिशत पंजीयन के सख्त निर्देश दिए हैं।
नील हरित काई:-यूरिया का स्वदेशी तोड़
बैठक के दौरान टिकाऊ खेती के लिए नील हरित काई को यूरिया का सबसे सस्ता और प्रभावी जैविक विकल्प बताया गया। रूआबांधा प्रक्षेत्र में इसका उत्पादन शुरू हो चुका है, जिसे जल्द ही 40 टांकों तक बढ़ाया जाएगा। यह तकनीक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए नाइट्रोजन की कमी को पूरा करेगी।
दलहन-तिलहन में दुर्ग संभाग ने गाड़ा झंडा
एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि पीएम आशा योजना के तहत दलहन-तिलहन खरीदी में दुर्ग संभाग पूरे प्रदेश में 60,000 क्विंटल के साथ अव्वल रहा है। किसानों के बढ़ते रुझान को देखते हुए पंजीयन की तारीख बढ़ा दी गई है। साथ ही, अब ग्रीष्मकालीन धान के बजाय सुगंधित किस्मों, मक्का और तिलहन के क्लस्टर विकसित करने पर फोकस किया जाएगा।