प्रदेश के नगरीय निकायों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। नवयुक्त अधिकारी-कर्मचारी कल्याण संघ के बैनर तले प्रदेश के 194 नगरीय निकायों के कर्मचारी आगामी 13 जुलाई से नवा रायपुर के तुता धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे। आंदोलन को सफल बनाने के लिए प्रदेश नेतृत्व द्वारा निकायों में लगातार दौरा कर कर्मचारियों को एकजुट किया जा रहा है।
इसी क्रम में संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी दुर्ग जिले के विभिन्न नगरीय निकायों के दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने कर्मचारियों के साथ बैठक कर संगठन को मजबूत करने और प्रस्तावित हड़ताल को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की।

पांच मांगों पर अड़े कर्मचारी
प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी ने कहा कि निकाय कर्मचारियों की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। इसी के चलते पांच प्रमुख मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में—
प्रत्येक माह की पहली तारीख को नियमित वेतन भुगतान,
पुरानी पेंशन योजना की बहाली,
समयबद्ध पदोन्नति,
सातवें वेतनमान के एरियर्स का भुगतान,
एनपीएस और जीपीएफ की काटी गई राशि को कर्मचारियों के खातों में जमा कराना शामिल है।

दुर्ग निगम में आयुक्त के खिलाफ भी नाराजगी
संघ के संयोजक संजय शर्मा ने दावा किया कि दुर्ग नगर निगम में कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि निगम आयुक्त के कथित तानाशाही रवैये से नाराज होकर 45 कर्मचारियों ने संघ की सदस्यता ग्रहण की है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है।
जिलेभर में समर्थन जुटाने का अभियान
प्रदेश नेतृत्व ने दुर्ग जिले के विभिन्न निकायों अमलेश्वर, उतई, गुंडरदेही, पाटन, जामुल, भिलाई और दुर्ग में कर्मचारियों से मुलाकात कर आंदोलन के लिए समर्थन मांगा। बैठकों में कर्मचारियों ने भी अपनी समस्याएं साझा कीं और हड़ताल को सफल बनाने का भरोसा दिलाया। शर्मा ने कहा कि जब तक सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

कामकाज प्रभावित होने की आशंका
यदि 13 जुलाई से प्रस्तावित हड़ताल शुरू होती है तो प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकायों में सफाई, जलापूर्ति, राजस्व वसूली, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, भवन अनुज्ञा और अन्य नागरिक सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच वार्ता पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।