प्रदेश सरकार एक ओर सुशासन, त्वरित शिकायत निवारण और जनसमस्याओं के समयबद्ध समाधान के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दुर्ग जिले में सामने आए आंकड़े इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री जनदर्शन से लेकर कलेक्टर जनदर्शन और केंद्र सरकार के पीजी पोर्टल तक 1455 शिकायतें और आवेदन लंबित पड़े हैं। इससे स्पष्ट है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी आम लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक लेकर लंबित प्रकरणों पर नाराजगी जताई और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई विभागों में तीन महीने से लेकर एक वर्ष से अधिक पुराने मामले भी लंबित हैं। आंकड़ों के अनुसार पीजी पोर्टल के 221, कलेक्टर जनदर्शन के 904, पीजीएन वेब पोर्टल के 181, पीजीएन पोस्ट पोर्टल के 108, ई-समाधान के 16 और मुख्यमंत्री जनदर्शन के 25 आवेदन अब तक लंबित हैं। यानी जनता द्वारा दर्ज कराई गई समस्याएं सरकारी फाइलों में धूल खा रही हैं।

सवालों के घेरे में शिकायत निवारण तंत्र
विशेषज्ञों का मानना है कि जनदर्शन और ऑनलाइन शिकायत पोर्टलों का उद्देश्य लोगों को त्वरित राहत देना है, लेकिन जब महीनों तक आवेदन लंबित रहें तो इन व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कई मामलों में नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि पोर्टल आधारित व्यवस्था का मकसद ही ऐसी परेशानियों को खत्म करना था।
कलेक्टर की फटकार से उजागर हुई लापरवाही
बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि एक माह से अधिक समय से लंबित मामलों का निराकरण दो दिनों के भीतर किया जाए। उन्होंने लंबित प्रकरणों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब भी तलब किया। समीक्षा के दौरान अनुपस्थित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर की नाराजगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि कई विभाग शिकायतों के निराकरण को लेकर गंभीर नहीं हैं। यदि सब कुछ व्यवस्थित होता तो इतनी बड़ी संख्या में मामले लंबित नहीं रहते।

सरकार के सुशासन मॉडल पर उठे सवाल
राज्य सरकार लगातार “सुशासन” और “जनकेंद्रित प्रशासन” की बात करती है, लेकिन दुर्ग जिले के आंकड़े कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब मुख्यमंत्री जनदर्शन, कलेक्टर जनदर्शन और ऑनलाइन पोर्टलों पर दर्ज शिकायतों का भी समय पर समाधान नहीं हो रहा, तो आम आदमी अपनी समस्या के समाधान के लिए आखिर जाए तो जाए कहां?
जनता को इंतजार, सिस्टम को फटकार
जिले में लंबित शिकायतों का यह आंकड़ा केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह उन हजारों लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ा है जिन्होंने समाधान की आस में आवेदन किए थे। अब देखना होगा कि कलेक्टर की फटकार के बाद विभागों की कार्यशैली में सुधार आता है या फिर शिकायतों का अंबार इसी तरह बढ़ता रहेगा।
