विश्व पर्यावरण दिवस पर बुलाई गई नगर निगम दुर्ग की विशेष सामान्य सभा राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का मंच बन गई। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम को मंजूरी देने के लिए आयोजित बैठक में शहर की स्वच्छता व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालयों के संचालन में कथित अनियमितता और निगम प्रशासन की कार्यशैली पर ऐसा बवाल मचा कि सत्ता और विपक्ष दोनों एक ही पाले में दिखाई दिए।
सार्वजनिक शौचालयों के संचालन की जांच रिपोर्ट आने के दो माह बाद भी टेंडर निरस्त नहीं किए जाने पर सदन गरमा गया। कांग्रेस पार्षद भास्कर कुंडले और जांच दल के सदस्य कुलेश्वर साहू ने प्रशासन पर सवाल उठाए। देखते ही देखते अन्य पार्षद भी निगम प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप लगाने लगे। स्थिति तब और असहज हो गई जब निर्दलीय पार्षद सीधे सभापति के सामने जमीन पर बैठ गए और तत्काल कार्रवाई की मांग करने लगे।
मामला बढ़ता देख निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सात दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद हंगामा शांत हुआ।
बैठक में सबसे ज्यादा मुखर भूमिका निगम सभापति श्याम शर्मा की रही। उन्होंने न केवल प्रशासन बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को आड़े हाथों लिया। सभापति ने कहा कि शहर में चारों तरफ कचरा फैला है, जगह-जगह कचरा जलाया जा रहा है और लोग धुएं से परेशान हैं, जबकि निगम पर्यावरण दिवस मना रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “पर्यावरण दिवस पर निगम खुद प्लास्टिक बोतलों में पानी परोस रहा है। पहले निगम को खुद सुधारने की जरूरत है।”
सभापति ने शौचालय जांच रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत नहीं किए जाने, डस्टबिन खरीदी के 3.80 करोड़ के टेंडर की स्थिति स्पष्ट नहीं करने और नियमित सामान्य सभा नहीं बुलाने पर भी नाराजगी जताई।
उरला वार्ड की उपेक्षा पर भिड़े पार्षद
उरला वार्ड के पार्षद सरस निर्मलकर ने विकास कार्यों और नालों की सफाई में उपेक्षा का आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया कि उरला को फिर से पंचायत में शामिल कर देना चाहिए। इस पर स्वास्थ्य प्रभारी नीलेश अग्रवाल और निर्मलकर के बीच तीखी बहस हो गई। सदन में कई मिनट तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण प्रभारी ही नाराज
बैठक में पर्यावरण प्रभारी काशीराम कोसरे ने भी निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शासन ने पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर बैठक बुलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन एजेंडा तक में उसका समुचित उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि अब केवल सड़क और नाली की राजनीति से ऊपर उठकर पर्यावरण संरक्षण पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
स्वच्छता नियम को मिली मंजूरी
राजनीतिक गर्माहट और हंगामे के बीच अंततः सदन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने सभी नगरीय निकायों को इस संबंध में प्रस्ताव पारित करने के निर्देश दिए थे।
राजनीतिक संदेश भी साफ
बैठक का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक सुविधाओं के मुद्दे पर निगम प्रशासन अब केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि अपने ही जनप्रतिनिधियों के निशाने पर है। सदन में सत्ता और विपक्ष की एकजुटता ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगामी दिनों में शौचालय टेंडर और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।