देश की सबसे महत्वाकांक्षी रेल माल परिवहन परियोजनाओं में शामिल ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EWDFC) अब दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से होकर गुजरने जा रहा है। परियोजना को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ी तैयारी शुरू हो चुकी है। कलेक्टर दुर्ग ने प्रस्तावित कॉरिडोर से प्रभावित होने वाले दुर्ग और पाटन तहसील के 18 गांवों में निजी जमीनों के खाता विभाजन, नामांतरण, खरीदी-बिक्री और अन्य राजस्व लेन-देन पर अगले आदेश तक अस्थायी रोक लगा दी है।

इन 18 गांवों पर सबसे पहले असर
प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए जिन गांवों को फिलहाल प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, उनमें दुर्ग तहसील के बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई, डुमरडीह शामिल हैं। वहीं पाटन तहसील के परेवाडीह, पहंडोर, सोमनी, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री और पथरीडीह , सिरसाकला और परसदा (पाहंदा) गांव भी प्रस्तावित कॉरिडोर की जद में आए हैं। इन गांवों में जमीन संबंधी किसी भी प्रकार के लेन-देन के लिए अब सीधे कलेक्टर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। संबंधित एजेंसी से अभिमत लेने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
क्या है ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर?
ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारतीय रेलवे की एक विशेष मालगाड़ी परियोजना है, जिसका उद्देश्य माल परिवहन को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाला बनाना है। करीब 2050 किलोमीटर से अधिक लंबा यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के दानकुनी से महाराष्ट्र-गुजरात क्षेत्र तक विकसित किया जाएगा। यह पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे छह राज्यों को जोड़ेगा।

मिल सकता है बड़ा औद्योगिक फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरिडोर बनने के बाद छत्तीसगढ़ के कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज और अन्य खनिज उत्पादों की ढुलाई कहीं अधिक तेज और सस्ती हो जाएगी। दुर्ग-भिलाई औद्योगिक क्षेत्र, इस्पात उद्योग और खनिज आधारित इकाइयों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है। मालगाड़ियों की यह नई लाइन पूरी तरह हाईटेक होगी। लाइन में डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनों का संचालन होगा। अधिक भार क्षमता वाली मालगाड़ियां चलेंगी। लाइन पूरी तरह लेवल क्रॉसिंग मुक्त ट्रैक होगी। आधुनिक कवच सुरक्षा प्रणाली के सिग्नल लगाए जाएंगे। इससे माल परिवहन समय में भारी कमी होगी।
बढ़ सकती हैं जमीनों की कीमतें
कॉरिडोर की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद प्रभावित गांवों में चर्चा का माहौल है। कई ग्रामीण इसे विकास और रोजगार का अवसर मान रहे हैं, जबकि कुछ किसानों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर जिज्ञासा बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि परियोजना के अंतिम अलाइनमेंट और रेलवे लॉजिस्टिक गतिविधियों के अनुसार आसपास की जमीनों की कीमतों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।