भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में करोड़ों रुपये के लौह स्क्रैप चोरी के संगठित गिरोह का खुलासा हुए अभी कुछ ही दिन बीते हैं कि अब कोक और कोयले की कथित चोरी का नया मामला सामने आ गया है। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने बीएसपी की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और औद्योगिक संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस ने खुर्सीपार क्षेत्र में एक कोयला कारोबारी के भंडारण स्थल पर दबिश देकर बड़ी मात्रा में संदिग्ध कोयला जब्त किया। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह कोयला बीएसपी के कोक ओवन, ब्लास्ट फर्नेस और सिंटर प्लांट से चोरी कर बाहर लाया गया था। क्राइम डीएसपी यदुमणि सिदार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने खुर्सीपार गेट के समीप स्थित कारोबारी विजय केशरवानी के भंडारण स्थल पर कार्रवाई की। मौके पर बड़ी मात्रा में कोयले का भंडारण मिला, जिसे पुलिस ने बीएनएसएस की धारा 106 के तहत जब्त कर जांच शुरू कर दी है।

स्क्रैप चोरी के बाद फिर सुरक्षा घेरे में सेंध
इस मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हाल ही में पुलिस ने बीएसपी से संगठित तरीके से लौह स्क्रैप चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उस मामले में करीब 250 टन स्क्रैप, मशीनरी और वाहनों सहित 3.22 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई थी तथा अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब कोयला चोरी का नया मामला सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बीएसपी जैसी देश की महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई से लगातार बड़े पैमाने पर सामग्री बाहर कैसे पहुंच रही है?
साइकिल से बाहर आता था कोयला!
पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ ठेका श्रमिक प्लांट के अलग-अलग हिस्सों से कोक और कोयला इकट्ठा कर बोरियों में भरते थे। बाद में वे साइकिल के जरिए दो से तीन चक्कर लगाकर इसे प्लांट से बाहर निकालते और स्थानीय कारोबारियों को बेच देते थे। यदि जांच में यह तथ्य प्रमाणित होते हैं तो यह केवल चोरी का मामला नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे संगठित नेटवर्क का संकेत माना जाएगा।

CISF और सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही थीं?
बीएसपी की सुरक्षा की जिम्मेदारी बहुस्तरीय व्यवस्था के तहत संचालित होती है। प्रवेश और निकास द्वारों पर निगरानी, जांच और सुरक्षा जांच की व्यवस्था मौजूद है। इसके बावजूद यदि कोयला और स्क्रैप जैसी भारी सामग्री नियमित रूप से बाहर निकल रही थी तो कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले की जांच केवल जब्त कोयले तक सीमित नहीं रहेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि कोयला कहां से आया, किन लोगों ने इसकी सप्लाई की और इसे खरीदने-बेचने के नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं।