छत्तीसगढ़ में खरसिया–नया रायपुर–परमलकसा और खारुन–रायपुर–परसदा रेल परियोजनाओं के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। मुआवजे में भारी कटौती और प्रशासनिक दबाव के विरोध में आज जिले के सैकड़ों किसानों ने कांग्रेस के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट का घेराव किया। किसानों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो वे अपनी जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश ठाकुर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक मनमानी की हद हो गई है। अभनपुर क्षेत्र के ग्राम भुरकुनी की पुरानी सूची की तुलना में जनवरी की नई सूची में प्रति हेक्टेयर 57 से 66 लाख रुपए तक की कटौती कर दी गई है। यह सीधे तौर पर किसानों के पेट पर लात मारने जैसा है।
कलेक्ट्रेट घेराव और नारेबाजी
इससे पहले, प्रभावित गांवों के किसान भारी संख्या में हिंदी भवन के सामने एकत्रित हुए। यहाँ धरना देने के बाद एक विशाल रैली निकाली गई। किसान ‘उचित मुआवजा हमारा हक है’ और ‘किसानों का दमन बंद करो’ जैसे नारे लगाते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों का आरोप है कि प्रशासन बिना सहमति और बिना सही मुआवजा तय किए जबरदस्ती जमीन कब्जाने की कोशिश कर रहा है।
आंदोलन होगा राज्यव्यापी
राकेश ठाकुर ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ दुर्ग की नहीं है। यदि जिला प्रशासन ने जल्द ही सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को उग्र किया जाएगा और इसे राज्य स्तर तक ले जाया जाएगा। इस प्रदर्शन में पुरई, पाऊवारा, चंगोरी, बिरेझर, थनौद, कोनारी, चंदखुरी, भानपुरी, बोरीगारका, करगाडीह, खोपली, कोकड़ी, कोड़िया और नवागांव सहित कई गांवों के किसान शामिल हुए।