दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में कथित रूप से ब्लड की कमी के कारण 22 वर्षीय युवती दीपिका की मृत्यु के मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमलता साहू ने प्रशासन और प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक युवा बेटी की मौत के बावजूद अस्पताल प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से न तो किसी जांच समिति का गठन किया गया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

प्रेमलता साहू ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देती हैं, लेकिन जब एक 22 वर्षीय बेटी की जान इलाज और रक्त की उपलब्धता के अभाव में चली जाती है तो जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में अब तक न तो किसी मंत्री और न ही स्थानीय विधायक का कोई बयान सामने आया है।

उन्होंने मांग की कि दीपिका की मौत की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि अस्पताल प्रबंधन या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही जिला अस्पताल में रक्त उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रेमलता साहू ने कहा कि किसी भी बेटी की मौत केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की क्षति है और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है। यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।