दुर्ग। नगर निगम दुर्ग की सामान्य सभा सोमवार को जोरदार हंगामे के बीच सुर्खियों में रही। महापौर अलका बाघमार ने अपना दूसरा बजट पेश करते हुए 580 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान रखा, लेकिन बजट से पहले और दौरान ही सदन में सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक शौचालय और मुक्तिधाम जैसे मूलभूत मुद्दों को लेकर तीखी बहस और विरोध देखने को मिला।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा पार्षदों ने अपनी ही नगर सरकार को सवालों के घेरे में ले लिया। बढ़ते हंगामे के चलते सभापति को बैठक एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
बैठक पुनः शुरू होने पर पार्षद संजय अग्रवाल ने शहर के 60 वार्डों में सार्वजनिक शौचालयों के संचालन का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि संचालन का कार्य सिर्फ दो महिला समूहों को सौंपा गया है, जो अन्य समूहों के साथ अन्याय है। इस पर सभापति ने जांच के लिए समिति गठित कर 10 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
वहीं पार्षद कुलेश्वर साहू ने मुक्तिधामों के उन्नयन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर भूमि पूजन होने के बावजूद कार्य अधूरा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों की पहल को नजरअंदाज कर प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है, जो जनप्रतिनिधियों का अपमान है।

पार्षद आशीष चंद्राकर ने अपने वार्ड में निगम मद से एक रुपए का काम नहीं होने पर अपने ही सरकार को घेरे में ले लिया। इसके बाद एमआईसी मेंबर देवनारायण चंद्राकर के साथ अच्छी बहस हो गई। जिस पर आशीष चंद्राकर ने कहा कि अन्य वार्डों में अगर करोड़ का काम दिया जा रहा है तो मेरे वार्ड में भी बीस तीस लाख का काम तो दे ही सकते हैं। क्या मैं इस सदन में पार्षद नहीं हूं जिस पर सदन में मौजूद अन्य पार्षदों ने भी इस सवाल पर अपनी सहमति दिया और कहा कि हमारे वार्ड में भी कोई भी काम अब तक नहीं हुआ है।

जब महापौर बजट पेश करने के लिए खड़ी हुईं, तो पार्षदों ने सफाई व्यवस्था के मुद्दे पर तत्काल चर्चा और जिम्मेदार कर्मचारियों को सदन में बुलाने की मांग को लेकर फिर हंगामा शुरू कर दिया। सभापति के आश्वासन के बाद ही पार्षद शांत हुए और बजट प्रस्तुति संभव हो सकी।
सफाई व्यवस्था को लेकर पार्षद सरस निर्मलकर ने अपने वार्ड में एक सप्ताह तक सफाई ठप रहने का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारियों से संपर्क करने के बावजूद कोई समाधान नहीं हुआ। इस पर सभापति ने संबंधित चपरासी को सदन में बुलवाया। पूछताछ में चपरासी ने कर्मचारियों को दूसरे वार्ड में लगाए जाने की बात कही, जिस पर दूसरे वार्ड के पार्षद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।

इस पर नाराज सभापति ने आयुक्त को सख्त निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारी और चपरासी को 24 घंटे के भीतर निलंबित करने का आदेश दिया, जिस पर पूरे सदन ने सहमति जताई।
इस सामान्य सभा की सबसे खास बात यह रही कि विपक्ष से ज्यादा सत्तापक्ष के पार्षदों ने ही अपनी नगर सरकार को घेरा और लगातार सवाल उठाए। वहीं विपक्षी पार्षद अश्वनी साहू ने माहौल को हल्का करते हुए शायरी के अंदाज में अपनी बात रखी, जिससे कुछ समय के लिए सदन का माहौल खुशनुमा हो गया।
नगर निगम की इस बैठक ने साफ कर दिया कि शहर में बुनियादी सुविधाओं को लेकर असंतोष गहरा है और अब सत्तापक्ष के भीतर से ही जवाबदेही की मांग तेज हो रही है।