नगर पालिक निगम दुर्ग की राजनीति में इस समय जबरदस्त उबाल देखा जा रहा है। एक तरफ जहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बुनियादी जनसमस्याओं को लेकर निगम कार्यालय का उग्र घेराव किया, वहीं दूसरी तरफ निगम के भीतर एक और बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। नगर निगम के सभापति श्याम शर्मा के नेतृत्व में जिस एमआईसी सदस्यों और पार्षदों के भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल ने निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल को घेरा और व्यवस्थाओं पर गहरा असंतोष जताया।
कमिश्नर से इस मुलाकात को भले ही बारिश पूर्व तैयारियों और सामान्य चर्चा का नाम दिया जा रहा हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे अपनी ही सरकार के निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के गहरे असंतोष और आंतरिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है। कमिश्नर सुमित अग्रवाल से मुलाकात कर व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम देने वाले इस सत्ताधारी प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के कद्दावर नेता और एमआईसी सदस्य शामिल थे। इनमें प्रमुख रूप से नरेंद्र बंजारे, काशीराम कोसरे, मनीष साहू, शिव नायक, कुलेश्वर साहू, देव नारायण ठण्डी, सुरूचि उमरे, जितेंद्र ताम्रकर, युवराज कुंजम, मनोज सोनी, ललिता ठाकुर, मनीष कोठारी, गुलाब वर्मा, कमल देवांगन, रामु सेन, जितेंद्र महोबिया, खालीक रिजवी, संजय अग्रवाल, गोविंद्र देवांगन, शिवेंद्र परिहार और खिलावन मटियारा सहित राकेश सेन व गुड्डू यादव शामिल थे।
प्रशासनिक कसावट पर उठाए सवाल
आमतौर पर किसी भी नगर निगम में सत्ताधारी दल के पार्षद और एमआईसी सदस्य अपनी ही शहर सरकार और प्रशासनिक मशीनरी का बचाव करते नजर आते हैं। लेकिन दुर्ग निगम में कहानी इसके उलट दिख रही है। मानसून सिर पर है और शहर के बड़े नालों की सफाई, बदहाल पेयजल व्यवस्था, पाइपलाइन के बार-बार होने वाले लीकेज और महीनों से अटकी वृद्धावस्था पेंशन जैसे मुद्दों को लेकर खुद भाजपा के ही दिग्गज पार्षदों को कमिश्नर के चेम्बर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा पार्षदों का यह कदम साफ तौर पर यह दर्शाता है कि निगम के भीतर अफसरों की कार्यशैली से खुद सत्ताधारी दल के लोग भी बुरी तरह त्रस्त हैं। वार्डों में जनता के तीखे सवालों का सामना कर रहे भाजपाइयों का सब्र अब जवाब दे चुका है, यही वजह है कि उन्हें खुद अपनी ही व्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोलने पर मजबूर होना पड़ा।
इन गंभीर मुद्दों पर जताई नाराजगी
बैठक के दौरान भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने जिन मुद्दों पर आयुक्त का ध्यान आकर्षित कराया, वे सीधे तौर पर निगम प्रशासन की विफलता को उजागर करते हैं।
0 नालों की सफाई में लेती-लतीफी – बारिश से ठीक पहले संवेदनशील और निचले इलाकों में जलभराव का डर यह साफ करता है कि समय रहते सफाई अभियान शुरू नहीं किया जा सका।
0 बघेरा पाइपलाइन का संकट – 19 और 20 मई को होने वाले जल संकट के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था (टैंकरों) के लिए पार्षदों को खुद गुहार लगानी पड़ रही है, जो प्रशासनिक दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
0 रुकी हुई वृद्धा पेंशन – समाज के सबसे कमजोर वर्ग की सामाजिक सुरक्षा पेंशन का अटकना सीधे तौर पर मानवीय और प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है।
क्या महापौर और संगठन के बीच बढ़ रही है दूरी?
इस मुलाकात के बाद दुर्ग की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का कहना है कि जहां कांग्रेस पार्टी महापौर और निगम प्रशासन को थप्पड़ की धमकी और अधिकारियों को बंधक बनाने जैसे गंभीर आरोपों पर घेर रही है, वहीं भाजपा के एमआईसी सदस्यों और पार्षदों का एकजुट होकर कमिश्नर के पास जाना यह संकेत देता है कि वर्तमान शहर सरकार के नेतृत्व और संगठन के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। जानकारों का कहना है कि अपनी ही सरकार होने के बावजूद अगर एमआईसी सदस्यों को अपनी मांगें मनवाने के लिए दबाव बनाना पड़ रहा है, तो यह साफ है कि दुर्ग निगम में प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी चरम पर है।