दुर्ग। आर्य नगर वार्ड क्रमांक 13 में घटित साहू परिवार की हृदयविदारक घटना ने पूरे दुर्ग शहर को शोक में डुबो दिया है। शनिवार को जब एक ही घर से चार अर्थियां निकलीं, तो हर आंख नम हो गई। मां, पिता और दो मासूम बच्चों की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों का दर्द शब्दों में बयां नहीं हो सका। हरनाबांधा मुक्तिधाम में चारों का अंतिम संस्कार किया गया, जहां माहौल इतना गमगीन था कि मौजूद लोग अपने आंसू नहीं रोक सके।

मृतक गोविंद साहू अपने परिवार के बड़े बेटे थे। बताया जा रहा है कि उनके पांच बहनें और तीन भाई हैं। परिवार की तमाम जिम्मेदारियां उन्होंने हमेशा मजबूती से निभाईं। बहनों और भाइयों की शादी तक की जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर उठाई थी। परिवार और मोहल्ले में उन्हें एक जिम्मेदार, शांत और मिलनसार व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। यही वजह है कि इस आत्मघाती कदम ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है।
परिजनों के अनुसार गुरुवार रात तक सब कुछ सामान्य था। पूरा परिवार साथ बैठकर खाना खाया, बातचीत की और किसी प्रकार की परेशानी या तनाव के संकेत नजर नहीं आए। पड़ोसियों का कहना है कि साहू परिवार हमेशा हंसता-खेलता और खुशहाल दिखाई देता था। ऐसे में अचानक सामने आई इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया।

पुलिस और फोरेंसिक टीम लगातार मामले की जांच में जुटी हुई है। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक सुसाइड नोट में लिखा गया है — “बच्चे मैंने पैदा किए हैं, मैं लेकर जा रही हूं… गोविंद साहू को उसके किए की सजा मिल रही है।” इन शब्दों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। शुरुआती जांच में चरित्र संदेह और पारिवारिक तनाव की आशंका जताई जा रही है।
फोरेंसिक टीम ने कमरे की बारीकी से जांच की, लेकिन मौके से किसी प्रकार का जहर या संदिग्ध पदार्थ नहीं मिला। केवल शराब की बोतल मिलने की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह आशंका है कि पहले बच्चों को नींद की दवा दी गई, उसके बाद उनकी हत्या की गई। इस भयावह दृश्य को देखने के बाद गोविंद साहू ने भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जबकि पत्नी चंचल साहू ने भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

घटना के बाद पूरे मोहल्ले में मातम पसरा हुआ है। अंतिम यात्रा के दौरान महिलाओं की चीख-पुकार और परिजनों का विलाप हर किसी का कलेजा चीर रहा था। सबसे ज्यादा दर्दनाक दृश्य तब देखने को मिला जब दो मासूम बच्चों की अर्थियां मां-पिता के साथ निकलीं। यह दृश्य देखकर मुक्तिधाम में मौजूद लोग भी खुद को संभाल नहीं सके।
फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद इस दर्दनाक घटना के पीछे छिपे कारणों का और खुलासा हो सकता है। पूरे शहर में बस एक ही सवाल गूंज रहा है— आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाने वाला एक खुशहाल परिवार एक ही पल में खत्म हो गया।