Public anger over the increase in registry fees in Durg is on the rise. Arun Vora reached the protest site and said that this is an anti-people decision
दुर्ग। भाजपा सरकार के ताज़ा फैसलों ने जमीन पंजीयन को आम लोगों के लिए और कठिन बना दिया है। नई जमीन के गाइडलाइन दरों में बेतहाशा बढ़ोतरी और अनियमितताओं के चलते पूरे प्रदेश में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। जनता का आरोप है कि इन निर्णयों से जमीन की रजिस्ट्री अब उनकी पहुँच से दूर होती जा रही है।

रजिस्ट्री शुल्क और गाइडलाइन दरों में वृद्धि के विरोध में छत्तीसगढ़ में जनआक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। प्रदर्शनकारी इसे आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बताते हुए चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया, तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा होगा।
इसी क्रम में दुर्ग में नागरिकों और व्यापारियों का आक्रोश सड़कों पर दिखा। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर सरकार पर जनता पर अनावश्यक आर्थिक दबाव डालने का आरोप लगाया।
आज वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक अरुण वोरा भी प्रदर्शनकारियों के पंडाल पहुँचे। उन्होंने लोगों की समस्याएँ सुनी और पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा रजिस्ट्री शुल्क और जमीन के बाजार मूल्य में की गई बढ़ोतरी आम जनता पर सीधा प्रहार है। जनहित में शुल्क कम किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके। भाजपा सरकार की नीतियों से जनता त्रस्त है और विरोध अब सड़कों पर खुलकर दिख रहा है।वोरा ने सरकार से मांग की है कि इस फैसले को वापस लिया जाए या इसमें तुरंत राहत दी जाए।

उन्होंने आगे कहा कि जमीन की गाइडलाइन दरों में की गई बढ़ोतरी, बिजली दर वृद्धि और कटौती से लोगों की नाराज़गी बढ़ रही है। धान खरीदी में अव्यवस्थाओं और किसानों के साथ हो रहे धोखे को लेकर भी प्रदेशभर में आंदोलन तेज हैं।
पहले भूमि के बाजार मूल्य का 30% कम करके पंजीयन शुल्क निर्धारित किया जाता था, जिससे लोगों को राहत मिलती थी। लेकिन अब इस राहत को समाप्त कर दिया गया है। बाजार मूल्य का पूरा 100% ही पंजीयन का आधार बन गया है, जबकि शुल्क की दरों में कोई कमी नहीं की गई।
इस निर्णय से आम जनता पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ा है.