Farmers submitted a memorandum to the Collector protesting arbitrary land acquisition, demanding an FIR for illegal survey
दुर्ग खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल परियोजना के अंतर्गत दुर्ग जिले के पुरई, पाऊवारा, करगाडीह, बोरीगारका, कोकड़ी, कोड़िया, घघुसीडीह, खोपली सहित दुर्ग ब्लाक एवं पाटन ब्लाक के अन्य गांवों की जमीन अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले किसानों ने आज दुर्ग जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष श्री राकेश ठाकुर जी एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष श्री देवेंद्र देशमुख तथा दुर्ग ग्रामीण जनपद उपाध्यक्ष श्री राकेश हिरवानी के द्वारा दुर्ग कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। किसानों ने मुख्य रूप से ‘प्रति हेक्टेयर दर’ पर मुआवजा निर्धारण, भू-विस्थापितों को रेलवे विभाग में स्थायी नौकरी दिए जाने, विस्तृत पुनर्वास पैकेज तथा RFCTLARR Act, 2013 के वैधानिक प्रावधानों को लागू करने की पुरजोर मांग की है।
मुआवजे में ‘प्रति हेक्टेयर दर’ पर गहरी आपत्ति
किसानों ने इस बात पर गहरा संशय व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पहली बार जमीन का मुआवजा ‘प्रति हेक्टेयर दर’ से देने का जो प्रावधान किया जा रहा है, वह छोटे भू-स्वामियों के लिए अन्यायपूर्ण है और इससे उन्हें वास्तविक बाजार मूल्य की तुलना में कम कीमत मिलेगी।

ज्ञापन में मुख्य मांगें:
RFCTLARR Act, 2013 को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
मुआवजा केवल ‘प्रति हेक्टेयर दर’ के आधार पर सीमित न किया जाए। कलेक्टर द्वारा धारा 26 के अनुसार, प्रत्येक खसरा के वास्तविक तथा आसपास मौजूद आवास एवं उद्योग के उपयोग (आवासीय/खेती की जमीन) को ध्यान में रखकर “बाजार मूल्य” निर्धारित किया जाए।
धारा 30 के अनुसार, Solatium (100%) और Rural Multiplier (2 गुना तक) का लाभ अनिवार्य रूप से दिया जाए।
जिन भू-विस्थापितों की आय का स्रोत उनकी भूमि से है जो अधिग्रहित हो रही है, उन्हें मुआवजे के अतिरिक्त पुनर्वास हेतु अन्य स्थान पर जमीन या एकमुश्त वित्तीय सहायता (5-10 लाख) प्रदान की जाए।
भू-विस्थापितों को रेलवे में स्थायी नौकरी की मांग
किसानों ने रेलवे विभाग से मांग की है कि जिस किसान की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, उसके परिवार के एक सदस्य को उनकी योग्यता के आधार पर रेलवे विभाग में स्थायी नौकरी दी जाए। श्री राकेश ठाकुर एवं देवेंद्र देशमुख जी ने बताया कि पहले रेलवे में भूमि अधिग्रहण के बदले नौकरी देने का नियम था, जिसे बहाल किया जाना चाहिए।
अवैध सर्वे पर एफआईआर की मांग
ज्ञापन में कलेक्टर को यह भी बताया गया कि MONARCH (पुणे, महाराष्ट्र) नामक निजी कंपनी द्वारा किसानों की अनुमति के बिना, और अधिकारियों की अनुपस्थिति में, उनकी निजी कृषि भूमि (खड़ी फसल वाले खेतों) में अनाधिकृत प्रवेश (आपराधिक Trespass) कर के अवैध सर्वेक्षण किया जा रहा है और बांस के खंभे गाड़े जा रहे हैं।
इस अवैध कार्य से खड़ी फसल (जैसे धान) को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया गया है। किसानों ने उतई थाने में इस संबंध में FIR दर्ज कराने के लिए आवेदन भी दिया है। श्री राकेश ठाकुर जी और जनपद उपाध्यक्ष श्री राकेश हिरवानी ने कलेक्टर से इस अवैध सर्वे को तुरंत रुकवाने तथा कंपनी और उसके कर्मचारियों के विरुद्ध FIR दर्ज कर दंडात्मक कार्यवाही करने की मांग की है।
बैठक में शामिल किसान
कलेक्टर से मुलाकात के दौरान उपस्थित रहने वाले प्रमुख किसानों में मोहन लाल साहू, नरेंद्र राजपूत, बंटी, प्रदीप देशमुख, उमेश साहू, मलेश निषाद,बीरेंद्र, क्षत्रपाल साहू ,थामेश साहू, चिंतामणि गजपाल , दिनेश यादव , सहित अन्य किसान शामिल थे। राकेश ठाकुर, देवेंद्र देशमुख, राकेश हिरवानी ने इस पूरे प्रकरण पर गंभीरता से संज्ञान लेने और यह सुनिश्चित करने का निवेदन किया है कि भू-विस्थापितों को वैधानिक, पारदर्शी और न्यायसंगत मुआवजा RFCTLARR Act, 2013 के अनुरूप प्राप्त हो।