भाषा अस्मिता अकादमी और जय जोहार साहित्य एवं संस्कृति संस्थान द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय काव्य उत्सव में विमतारा साहित्य, संस्कृति और संवेदनाओं के रंग में डूब गया। छत्तीसगढ़ मित्र के सहयोग से आयोजित इस भव्य समारोह में देश-विदेश के सौ से अधिक कवियों ने काव्य पाठ कर नक्सलमुक्त बस्तर के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
कार्यक्रम में अमेरिका से पहुंचीं कवयित्री अनीता कपूर ने भारतीय और अमेरिकी कविता की संवेदनाओं पर अपनी बात रखते हुए कहा कि भारत की कविता रिश्तों, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी आत्मीयता को अभिव्यक्त करती है, जबकि अमेरिकी कविता आधुनिकता, स्त्री मुक्ति और वैयक्तिकता के साथ संवेदना को सामने लाती है। उन्होंने कहा कि भारत की कविता आत्मा को छूती है और अमेरिका की कविता आत्मा को जगाती है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शशांक शर्मा ने कहा कि बस्तर अब बदल रहा है और सशस्त्र नक्सलवाद समाप्त होने के बाद वहां की संस्कृति और सभ्यता को नए स्वरूप में दुनिया के सामने लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों में सांस्कृतिक रूप से बस्तर को नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई साहित्य और संस्कृति के माध्यम से की जानी चाहिए।
हलबी गीतों से गूंजा सभागार, 10 साल की बाल कवयित्री ने मोहा मन
दो सत्रों में आयोजित काव्य पाठ में अमेरिका, मुंबई, लखनऊ, आगरा, सागर और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों से आए कवियों ने भाग लिया। बस्तर से पहुंचे कवियों ने हलबी गीतों के जरिए नक्सलमुक्त बस्तर का स्वागत किया। समारोह में 10 वर्षीय बाल कवयित्री ने दोहे सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में जयप्रकाश मानस, सीमा निगम, सुधीर शर्मा सहित कई साहित्यकारों ने कविता, समाज और बदलते समय पर अपने विचार रखे।