दुर्ग के सिविल लाइन स्थित कचना धुरवा देवालय भवन को लेकर केंद्रीय गोंड महासभा धमधागढ़ में चल रहा विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है। भवन के आधिपत्य और चाबी सौंपने के मुद्दे पर महासभा के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक पक्ष को प्रशासन द्वारा भवन की चाबी सौंपे जाने के विरोध में दूसरे खेमे के पदाधिकारी और सामाजिक प्रतिनिधि सोमवार को कलेक्टोरेट पहुंच गए, जहां जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी हुई।प्रदर्शनकारी समाजिक प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने विवाद सुलझने से पहले ही एक पक्ष को भवन का आधिपत्य देकर पूरे समाज को गुमराह करने का काम किया है। विरोध में समाज के लोगों ने दूसरे खेमे के पदाधिकारियों के प्रतीक स्वरूप पुतला भी जलाया।
चुनाव विवाद से शुरू हुआ टकराव
दरअसल केंद्रीय गोंड महासभा में पदाधिकारियों के चुनाव को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा है। पहले हुए चुनाव पर आरोप लगे कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और अपात्र लोगों को मतदान कराया गया। शिकायत के बाद फर्म्स एवं सोसायटी विभाग ने नई अनुमोदित मतदाता सूची के आधार पर दोबारा चुनाव कराया, जिसमें दूसरा खेमा विजयी घोषित हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कचना धुरवा देवालय भवन में ताला लगा दिया था। बाद में दोनों चुनावों को अमान्य मानते हुए नए सिरे से चुनाव कराने का निर्णय लिया गया। इसी बीच एक गुट के प्रदर्शन के बाद प्रशासन द्वारा कथित रूप से भवन की चाबी सौंपे जाने से दूसरा पक्ष भड़क गया।
पुलिस ने रोका, सड़क पर धरने पर बैठे
महासभा से जुड़े विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि देवालय परिसर से रैली निकालते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे। यहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें गेट से पहले ही रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के बाद समाज के पदाधिकारियों ने विष्णुदेव साय के नाम ज्ञापन सौंपकर मांग की कि कचना धुरवा देवालय भवन का आधिपत्य वास्तविक प्रतिनिधियों को सौंपा जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रशासन के फैसले से समाज में भारी नाराजगी फैल गई है।