दुर्ग जिले के ग्राम चिंगरी में प्रस्तावित मत्स्य सहकारी समिति के पंजीयन को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी सवालों के केंद्र में आ गया है। शिकायतकर्ता गुलाब देशमुख ने आरोप लगाया है कि एक अपंजीकृत मछुआ समूह ने स्वयं को मर्यादित सहकारी समिति बताकर कथित रूप से जाली सील-मुहर, शपथ-पत्र और भ्रामक दस्तावेजों का उपयोग किया, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में जनदर्शन, सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कराए 20 दिनों से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो कथित फर्जी संस्था की जांच पूरी हुई और न ही जाली दस्तावेजों के आरोपों पर पुलिस स्तर पर कोई कार्रवाई शुरू हो सकी है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शिकायत में कहा गया है कि जिस संस्था को लेकर विवाद है, उसका सहकारिता विभाग में वैध पंजीयन नहीं हुआ है। इसके बावजूद संस्था द्वारा आवेदन, आपत्तियों और न्यायालयीन दस्तावेजों में मर्यादित शब्द का उपयोग कर स्वयं को पंजीकृत सहकारी संस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस आधार पर विभागीय अधिकारियों और न्यायालय को गुमराह करने का प्रयास किया गया, जिससे प्रशासनिक निर्णय प्रभावित हुए।

मछली पालन विभाग की भूमिका पर भी सवाल
मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मछली पालन विभाग के कुछ आधिकारिक पत्रों में भी उक्त संस्था को मर्यादित संस्था के रूप में संबोधित किया गया है। इससे विभागीय भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। शिकायतकर्ता ने उप संचालक मछली पालन दुर्ग की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा है कि विभागीय पत्राचार के कारण वैधानिक प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित दूसरी मत्स्य सहकारी समिति का पंजीयन प्रभावित हुआ और प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित हो गई।
फोरेंसिक जांच की मांग
गुलाब देशमुख का कहना है कि यदि संस्था का वैध पंजीयन नहीं हुआ है, तो उसके नाम से सील-मुहर बनाना, मर्यादित शब्द का उपयोग करना और शपथ-पत्र प्रस्तुत करना गंभीर विषय है। उन्होंने संबंधित दस्तावेजों और सील-मुहर की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कथित फर्जी समिति द्वारा लगाए गए आपत्तियों और प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिसके कारण उनकी प्रस्तावित वैधानिक समिति का पंजीयन अटक गया। इससे समिति के सदस्यों के अधिकार और हित प्रभावित हुए हैं।

शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें
0 कथित फर्जी समिति की वैधानिक स्थिति की जांच कर कार्रवाई की जाए।
0 जाली सील-मुहर और दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
0 पुलिस को आवश्यक निर्देश देकर आपराधिक जांच प्रारंभ कराई जाए।
0 उप संचालक मछली पालन, दुर्ग की भूमिका की विभागीय जांच की जाए।
0 समिति पंजीयन में हुई देरी और बाधा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।