दुर्ग जिले में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी ईस्ट एण्ड वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर परियोजना के निर्माण को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा पूर्व में जारी किए गए प्रतिबंधात्मक आदेश में आंशिक संशोधन करते हुए एक नया संशोधित आदेश जारी किया गया है।
इस संशोधित आदेश के तहत परियोजना से प्रभावित होने वाले दुर्ग, पाटन और भिलाई-3 तहसील के कुल 25 ग्रामों को शामिल किया गया है। प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा करने और परियोजना के कार्यान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन सभी 25 गांवों की निजी भूमियों के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन तथा खरीदी-बिक्री आदि पर तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश पर्यन्त अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अब ये 25 ग्राम होंगे पूरी तरह प्रभावित
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जारी आदेश की कंडिका-4 में आंशिक सुधार करते हुए अब तीन तहसीलों के अंतर्गत आने वाले दुर्ग तहसील के अंतर्गत 9 ग्राम, बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई और डुमरडीह, पाटन तहसील के अंतर्गत 10 ग्राम, परेवाडीह, पहंडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरुदडीह और बटंग और भिलाई-3 तहसील के अंतर्गत 6 ग्राम, सिरसाकला, परसदा (पाहंदा), सोमनी, गनियारी, देवबलोदा और उरला को इस प्रतिबंधात्मक दायरे में शामिल किया है।

इसलिए लिया गया यह फैसला
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर जैसी राष्ट्रीय महत्व की बड़ी रेल परियोजनाओं के निर्माण के दौरान अक्सर भू-माफियाओं और बिचौलियों द्वारा जमीनों की अवैध खरीदी-बिक्री या अचानक डायवर्जन कराकर मुआवजा राशि में हेरफेर करने के प्रयास किए जाते हैं। इससे सीधे तौर पर मूल और वास्तविक भू-स्वामी (ग्रामीणों) के हितों को नुकसान पहुंचता है। इसी गड़बड़ी को रोकने और पूरी भू-अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।