प्रदेश सरकार के बहुचर्चित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान दुर्ग जिले के थनौद गांव में उस समय माहौल गरमा गया, जब गांव की एक शिकायत को लेकर पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के सामने कथित तौर पर … तेरे को जो करना है कर ले…तक कह दिया। खास बात यह रही कि पूरा घटनाक्रम दुर्ग ग्रामीण विधायक एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त ललित चंद्राकर की मौजूदगी में हुआ।
जानकारी के अनुसार भाजपा मंडल महामंत्री पुराण साहू गांव के शासकीय स्कूल परिसर की भूमि पर निर्मित सामुदायिक भवन से जुड़ी शिकायत लेकर कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनका आरोप था कि भवन निर्माण को लेकर पूर्व में आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जनपद पंचायत द्वारा निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया और भुगतान भी जारी कर दिया गया। पुराण साहू का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से भी की थी। आरोप है कि जांच के दौरान निर्माण कार्य में अनियमितता पाए जाने पर राशि वसूली के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी विषय को लेकर वे सुशासन तिहार शिविर में पुनः आवेदन देने पहुंचे थे।
जानिए क्या है पूरा विवाद
स्कूल की जमीन पर भवन – जानकारी के अनुसार यह पूरा विवाद ग्राम थनौद के सरकारी स्कूल की बेशकीमती जमीन पर बने एक सामुदायिक भवन को लेकर हुआ। भाजपा मंडल महामंत्री पुराण साहू ने पूर्व में स्कूल परिसर में इस भवन निर्माण का पुरजोर विरोध किया था, जिसके बाद खुद जनपद CEO रूपेश पांडे ने इस निर्माण कार्य पर रोक लगाया था।
स्टे के बाद भी जारी हुआ पैसा – आरोप है कि रोक के बावजूद सांठगांठ कर न केवल निर्माण कार्य को अवैध रूप से पूरा कराया गया, बल्कि ठेकेदार को पूरी निर्माण राशि भी गुपचुप तरीके से जारी कर दी गई।
कलेक्टर का आदेश की अनदेखी – भाजपा नेता पुराण साहू ने इस गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत सीधे दुर्ग कलेक्टर से की थी। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने निर्माण राशि की रिकवरी (वसूली) के मौखिक निर्देश भी जारी किए थे, लेकिन जनपद CEO ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
आवेदन को लेकर बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि आवेदन प्रस्तुत करने के दौरान पुराण साहू और जनपद CEO रूपेश पांडे के बीच चर्चा शुरू हुई, जो कुछ ही देर में तीखी बहस में बदल गई। आरोप है कि बहस के दौरान अधिकारी ने आपा खो दिया और कार्यकर्ता को उंगली दिखाते हुए चुनौतीपूर्ण लहजे में बात की। इससे मौके पर मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। घटना के दौरान कुछ समय के लिए कार्यक्रम स्थल का माहौल तनावपूर्ण हो गया। उपस्थित लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को शांत कराया।
ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने जताई नाराजगी
विवाद के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, लेकिन शिकायत लेकर पहुंचे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
CEO पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जनपद CEO रूपेश पांडे के खिलाफ पूर्व में भी कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हाल के दिनों में एक महिला सचिव द्वारा भी उनके खिलाफ प्रताड़ना संबंधी शिकायत किए जाने की बात चर्चा में रही है।
विधायक बोले- मामले की होगी जांच
घटना को लेकर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि किसी भी अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधियों या आम नागरिकों के साथ अनुचित व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सुशासन तिहार के दौरान हुई इस घटना ने प्रशासनिक कार्यशैली और शिकायत निवारण की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।