The incomplete statue at Azad Chowk sparked public outrage, a mockery of the honour of martyr Chandrashekhar Azad!
रिसाली (भिलाई): स्टेशन मरोदा के पास स्थित आज़ाद चौक पर अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जनप्रतिनिधियों द्वारा हाल ही में स्थापित की गई प्रतिमा में शहीद के उस हाथ को हटा दिया गया है जिसमें उनकी पहचान बनी पिस्तौल दर्शाई जाती है। इससे प्रतिमा अधूरी प्रतीत हो रही है और क्षेत्रवासियों में भारी रोष व्याप्त है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह अमर शहीद के त्याग और संघर्ष का अपमान है। लोगों का तर्क है कि शहीद की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक स्वरूप के अनुरूप पूर्ण और गरिमामय होनी चाहिए। अधूरी प्रतिमा से न केवल भावनाएं आहत हुई हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक गलत संदेश भी जाएगा।
क्षेत्रवासियों ने नगर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि आज़ाद चौक से वर्तमान अधूरी प्रतिमा को हटाकर शीघ्र ही शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की उपयुक्त व पूर्ण प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि शहीदों के सम्मान की गरिमा बनी रहे।
स्थानीय युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे। लोगों की एक ही मांग है—“शहीद का अपमान नहीं, सम्मान चाहिए।”