प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ डीएपी और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पाटन विधानसभा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और पाटन विधायक भूपेश बघेल ने सोमवार को पाटन क्षेत्र की सेवा सहकारी समितियों का दौरा कर किसानों से सीधे संवाद किया और खाद-बीज की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सोमनी स्थित सेवा सहकारी समिति पहुंचकर किसानों की समस्याएं सुनीं तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

राजनीतिक जानकार इस दौरे को महज सहकारी समिति निरीक्षण नहीं, बल्कि प्रदेश में उभर रहे खाद संकट के मुद्दे पर कांग्रेस की आक्रामक रणनीति के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि खरीफ सीजन के ठीक पहले किसानों को पर्याप्त मात्रा में डीएपी और अन्य उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जबकि सरकार व्यवस्था दुरुस्त होने का दावा कर रही है। सोमनी समिति में किसानों, महिला समूहों और समिति सदस्यों से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने खाद, बीज और कृषि आदानों की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था तथा किसानों को आ रही दिक्कतों की जानकारी ली। किसानों ने भी खुले तौर पर अपनी समस्याएं रखीं। बघेल ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

खाद संकट को लेकर बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी
दरअसल पिछले कुछ सप्ताह से प्रदेश के विभिन्न जिलों में डीएपी की कमी और वितरण व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे समय में पाटन से भूपेश बघेल का मैदान में उतरना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस इसे किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने का अवसर मान रही है, जबकि भाजपा सरकार लगातार पर्याप्त खाद उपलब्ध होने का दावा कर रही है। पाटन विधानसभा में यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि यह क्षेत्र भूपेश बघेल का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार खाद और कृषि व्यवस्था को लेकर कांग्रेस इतने संगठित तरीके से गांव-गांव पहुंच रही है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि विपक्ष किसानों के मुद्दों पर सीधे मैदान में मौजूद है।

पाटन से प्रदेशव्यापी अभियान की तैयारी?
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि किसानों की शिकायतें व्यापक स्तर पर सामने आती हैं तो कांग्रेस इसे प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दे सकती है। सहकारी समितियों के निरीक्षण को उसी रणनीति की शुरुआती कड़ी माना जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और यदि किसानों को भटकना पड़ा तो पार्टी सड़क से सदन तक आवाज उठाएगी। सोमनी में आयोजित कार्यक्रम में दुर्ग ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष राकेश ठाकुर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुजीत बघेल, पुरुषोत्तम तिवारी सहित बड़ी संख्या में किसान, महिला समूहों की सदस्याएं और कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कृषि और खाद आपूर्ति बनेगा राजनीतिक मुद्दा
खाद संकट के मुद्दे पर पाटन से शुरू हुई यह सक्रियता आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति का बड़ा विषय बन सकती है। किसानों के बीच पहुंचकर भूपेश बघेल ने साफ संकेत दिया है कि कांग्रेस आगामी खरीफ सीजन में कृषि और खाद आपूर्ति को प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
