Why the silence on the education mafia? District education officers are reluctant to take action against the private school-book depot nexus
दुर्ग। शिव सेना दुर्ग इकाई ने जिला शिक्षा अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकारी स्कूलों में केवल खानापूर्ति और दिखावटी निरीक्षण किया जा रहा है, जबकि असल समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
शिव सेना का कहना है कि कई सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी इस ओर आंखें मूंदे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर निजी स्कूलों में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, जिन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।

पार्टी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल संचालक कुछ चुनिंदा बुक डिपो संचालकों से मिलीभगत कर वर्षों से महंगी किताबें बिकवा रहे हैं। एन.सी.आर.टी. पुस्तकों के नाम पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें जबरन खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जा रहा है। स्कूल और दुकानदार मिलकर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं, जो सीधा-सीधा धोखाधड़ी है।
शिव सेना ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं का समय नज़दीक है, ऐसे में बच्चों और अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अन्यायपूर्ण है। पार्टी ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि:
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को तत्काल पूरा किया जाए।
निजी स्कूलों द्वारा किताबों की जबरन बिक्री पर रोक लगाई जाए।
स्कूल–बुक डिपो गठजोड़ की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
शिव सेना दुर्ग ने चेतावनी दी है कि यदि इस ज्ञापन पर तत्काल ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों के भविष्य को लेकर पार्टी उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।