Fight for rights: UGC's new rules spark uproar in Chhattisgarh, Rajput Kshatriya community opens front
Durg. राजपूत श्रत्रिय महासभा छत्तीसगढ़ दुर्ग द्वारा पटेल चौक से रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर यूजीसी में हुए बदलाव के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे हैं जिसमें केंद्रीय, जिला, उपसमिति पदाधिकारीयो सहित लगभग 200 के आसपास समाज के महिला पुरुष उपस्थित रहे।
उच्च शिक्षण संस्थाओं में जातिगत समानता हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार द्वारा नये नियम बनाये गये है, जो 13 जनवरी 2026 से प्रभावशील हो गये हैं।

प्रभावी नियम में सामान्य संवर्ग के छात्रों एवं प्राध्यापकों पर उभयपक्षों के द्वारा झूठे आरोप-प्रत्यारोप लगाकर फंसाये जाने की आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा सकता, चूंकि नये नियम में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के विरुद्ध संबंधित अ.जा /अ.ज.जा./अ.पि.व. के छात्रओं द्वारा लगाये आरोपों पर सीधे कार्यवाही संस्थित होना है, आरोपों को पृष्टि करने अथवा जिनके विरुद्ध आरोप / शिकायत है, उन्हें भी अपना पक्ष रखने का कोई अवसर प्रदान नहीं करता, इससे प्राकृतिक न्याय का हनन संभावित है। यह अव्यवहारिक एवं सामान्य संवर्ग के लोगो पर एकपक्षीय कार्यवाही का स्पष्ट संदेश है।
उक्त नियम में समानता के अधिकार अंतर्गत संवर्ण समुदाय के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों के हितसंवर्धन में नियम वापस लिया जाना प्रासंगिक है। न्यायोचित है।

नए नियमों में क्या था?
जहां 2012 के नियमों में ‘भेदभाव’ की बात की गई थी वहीं 2026 में लाए गए संशोधित नियमों में भेदभाव की परिभाषा में ‘जाति‑आधारित भेदभाव’ को जोड़ा गया है.
नए नियमों के मुताबिक़ “जाति-आधारित भेदभाव” का मतलब सिर्फ़ जाति या जनजाति के आधार पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध किया जाने वाला भेदभाव है.
नए नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज को समान अवसर केंद्र या इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर स्थापित करना होगा.
इस केंद्र का काम वंचित समुदायों के हितों से जुड़ी योजनाओं पर नज़र रखना, छात्रों और कर्मचारियों को पढ़ाई, सामाजिक मामलों और पैसों से जुड़ी सलाह देना, परिसर में विविधता और सबको साथ लेकर चलने का माहौल बढ़ाना और ज़रूरत पड़ने पर ज़िला और राज्य की कानूनी सेवा संस्थाओं की मदद से कानूनी सहायता उपलब्ध कराना होगा.
इस केंद्र के तहत एक समता समिति बनाई जाएगी, जिसकी अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख करेंगे. इस समिति में वरिष्ठ शिक्षक, सिविल सोसायटी के सदस्य और छात्र शामिल होंगे. यह समिति भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी.
नए नियमों के हिसाब से प्रत्येक संस्थान को एक चौबीसों घंटे उपलब्ध ‘समता हेल्पलाइन’ चलानी होगी.
अगर किसी छात्र, शिक्षक या कर्मचारी को लगे कि उसके साथ भेदभाव हुआ है तो वह हेल्पलाइन, ऑनलाइन पोर्टल या समान अवसर केंद्र को ईमेल के ज़रिए शिकायत दर्ज कर सकता है. अनुरोध करने पर शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.