भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। करीब 20 दिनों से फरार चल रहे मुख्य आरोपी संजय सिंह को उत्तरप्रदेश के देवरिया से गिरफ्तार कर दुर्ग लाया गया है। मामले में एक अन्य आरोपी पिंटू उर्फ उपेंद्र ओझा को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर सात दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां उनसे चोरी के नेटवर्क और अन्य संलिप्त लोगों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

पुलिस के अनुसार 26 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर हथखोज स्थित ए.के. ट्रेडर्स में छापेमारी की गई थी। जांच के दौरान फ्लू डस्ट के परिवहन की आड़ में बीएसपी से चोरी किए गए लोहे के स्क्रैप का अवैध भंडारण और परिवहन किए जाने का खुलासा हुआ था। मौके से लगभग 250 टन लोहे की प्लेट और बीम कटिंग बरामद की गई थी, जिसकी कीमत करीब 90 लाख रुपए आंकी गई थी।
3.22 करोड़ की संपत्ति जब्त
कार्रवाई के दौरान स्क्रैप के साथ-साथ परिवहन और लोडिंग में उपयोग किए जा रहे हाईवा, ट्रक, मशीनरी और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए थे। कुल जब्त संपत्ति का मूल्य लगभग 3 करोड़ 22 लाख रुपए बताया गया है। यह हाल के वर्षों में जिले में स्क्रैप चोरी से जुड़ी सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

गिरफ्तारी से बचने लगातार बदल रहा था ठिकाना
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी संजय सिंह अपराध दर्ज होने के बाद से लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। तकनीकी निगरानी और मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस टीम को उसके उत्तरप्रदेश के देवरिया जिले में छिपे होने की जानकारी मिली। इसके बाद विशेष टीम ने वहां दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया।
पहले ही 8 आरोपी जा चुके हैं जेल
इस मामले में पुलिस पहले ही आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज चुकी है। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उम्मीद है कि स्क्रैप चोरी के पूरे सिंडिकेट और इसके आर्थिक नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे हो सकते हैं।

रिमांड में कई राज खुलने की उम्मीद
पुलिस सूत्रों के मुताबिक रिमांड के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि बीएसपी से स्क्रैप चोरी का नेटवर्क कितने समय से संचालित हो रहा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा चोरी की सामग्री किन-किन स्थानों पर खपाई जाती थी।
