प्रदेश में 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही कांग्रेस ने सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। पूर्व विधायक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अरुण वोरा ने दुर्ग शहर के विभिन्न शासकीय विद्यालयों का निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया और आरोप लगाया कि सरकार बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है।
वोरा ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पहले से ही शिक्षकों की कमी और प्रशासनिक उदासीनता से जूझ रही है। दुर्ग जिले में करीब 1100 सहायक शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों से जुड़े 250 शिक्षकीय पदों पर भी नियुक्तियां लंबित हैं। इसके अलावा सैकड़ों स्कूलों में मरम्मत कार्य की जरूरत होने के बावजूद आवश्यक स्वीकृतियां नहीं मिल पाई हैं।

पोटिया स्कूल सबसे ज्यादा चिंताजनक
निरीक्षण के दौरान पोटिया शासकीय विद्यालय की स्थिति बेहद खराब पाई गई। वोरा ने बताया कि भवन को खतरनाक घोषित कर हटाने की मांग पिछले तीन वर्षों से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बरसात में परिसर में तीन फीट तक पानी भर जाता है, जिससे करीब 250 विद्यार्थियों को हर साल परेशानी उठानी पड़ती है।
झुग्गीपारा स्कूल में आग के बाद भी नहीं हुई मरम्मत
झुग्गीपारा शासकीय विद्यालय में एक माह पहले कक्षा कक्ष में आग लगने की घटना हुई थी। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत अब तक नहीं कराई गई है। यहां लगभग 260 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और उन्हें उसी परिसर में पढ़ाई करनी पड़ रही है।

बोरसीभाठा स्कूल में टपकती छत, झड़ता प्लास्टर
बोरसीभाठा विद्यालय की हालत भी चिंताजनक बताई गई। कक्षाओं में पानी रिसाव, छत से झड़ता प्लास्टर और जर्जर शौचालय विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने भी आशंका जताई कि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो बड़ा हादसा हो सकता है।
विज्ञापनों में व्यस्त सरकार, स्कूलों की सुध नहीं
अरुण वोरा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुधारने के बजाय प्रचार-प्रसार और अन्य गतिविधियों में अधिक व्यस्त है। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने से पहले स्कूल भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निरीक्षण के बाद उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा से दूरभाष पर चर्चा कर तत्काल मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की।

कांग्रेस ने उठाई राज्यव्यापी सर्वे की मांग
वोरा ने मांग की कि स्कूल खुलने से पहले राज्यभर के जर्जर स्कूल भवनों का विशेष सर्वे कराया जाए। जहां भवन खतरनाक स्थिति में हैं, वहां तत्काल मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि विद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा, बच्चों की सुरक्षा किसी भी सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जर्जर भवनों में पढ़ाई करवाना जोखिम भरा है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।