दुर्ग जिले में अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी को लेकर राजनीति गरमा गई है। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) विभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कथित तौर पर जनप्रतिनिधियों के प्रति की गई टिप्पणी को कांग्रेस ने बड़ा मुद्दा बना दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जिले में नौकरशाह निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को महत्व नहीं दे रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना कमजोर हो रही है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया कोऑर्डिनेटर देवकुमार जंघेल तथा नगर निगम दुर्ग के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अब्दुल गनी और लिखन साहू ने संयुक्त बयान में कहा है कि जिला पंचायत की बैठक में साजा विधायक ईश्वर साहू समेत अन्य जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर आरईएस के कार्यपालन अभियंता मेश्राम ने कथित रूप से यह कह दिया कि जनप्रतिनिधि चाहें तो उनका तबादला करा दें या निलंबित करा दें। कांग्रेस नेताओं ने इसे जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि यदि अधिकारी निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति ऐसा रवैया अपनाते हैं, तो आम नागरिकों की समस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

ललित चंद्राकर प्रकरण का भी किया जिक्र
कांग्रेस नेताओं ने दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक ललित चंद्राकर से जुड़े एक पुराने विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में पहले भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव की स्थिति सामने आ चुकी है। उनका आरोप है कि कई अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लेते, जिससे जनता की समस्याओं के समाधान पर भी असर पड़ता है।
जनता खुद को ठगा महसूस कर रही
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की बात अधिकारियों द्वारा अनसुनी की जाती है, तो आम लोगों में यह संदेश जाता है कि उनकी समस्याओं का समाधान कराने वाला कोई नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इससे जनता में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। नेताओं ने कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज होते हैं और प्रशासनिक अधिकारियों को उनके साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर असर पड़ना तय है।
