कृषि भूमि की बिक्री में फर्जीवाड़ा कर करोड़ों की संपत्तियों से जुड़े मामलों के बीच दुर्ग जिले में जमीन धोखाधड़ी का एक और चर्चित मामला सामने आया है। पाटन पुलिस ने करीब तीन वर्ष पुराने प्रकरण में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। आरोपी पर अपने ही सेना में पदस्थ भाई के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर संयुक्त स्वामित्व वाली कृषि भूमि बेचने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार मामला ग्राम कुम्हली की कृषि भूमि से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने वर्ष 2023 में थाना पाटन में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके बड़े भाई ने संयुक्त नाम की जमीन बेचने के लिए भारतीय सेना में कार्यरत अपने सगे भाई की जगह किसी अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर दस्तावेज तैयार कराए और भूमि का विक्रय कर दिया। जांच में सामने आया कि भूमि के वास्तविक सह-स्वामी की जानकारी छिपाकर कथित रूप से प्रतिरूपण और कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं के तहत मामला कायम किया था।

तीन साल से बच रहा था गिरफ्तारी से
पुलिस अधिकारियों के अनुसार विवेचना में आरोपी की भूमिका प्रमाणित होने के बाद उसकी तलाश की जा रही थी, लेकिन घटना के बाद से वह लगातार फरार था। तकनीकी जानकारी, मुखबिर तंत्र और लगातार निगरानी के बाद पुलिस ने 7 जून को घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान ईश्वर दास (60 वर्ष), निवासी महादेवघाट, रायपुर के रूप में हुई है। आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
जमीन खरीदने वालों के लिए चेतावनी
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि भूमि क्रय-विक्रय में केवल रजिस्ट्री कराना पर्याप्त नहीं है। खरीदारों को सह-स्वामियों की पहचान, राजस्व अभिलेख, पावर ऑफ अटॉर्नी, आधार दस्तावेज और गवाहों का सत्यापन भी सावधानीपूर्वक करना चाहिए। कई मामलों में फर्जी पहचान और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए जमीन सौदों को अंजाम दिया जाता है, जिसका खामियाजा बाद में खरीदारों को भुगतना पड़ता है।