दुर्ग। दुर्ग जिला अस्पताल से सामने आए एक दर्दनाक मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरोदा निवासी 21 वर्षीय दीपिका गाड़ा की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि खून की कमी से जूझ रही दीपिका को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से समय पर एक यूनिट रक्त तक उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण उसकी जान नहीं बच सकी।

जानकारी के अनुसार दीपिका गाड़ा को गंभीर हालत में दुर्ग जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने भर्ती के समय ही मरीज में रक्त की भारी कमी होने की बात कहते हुए तत्काल ब्लड की व्यवस्था करने को कहा था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार समय रहते रक्त की व्यवस्था नहीं कर पाया और अस्पताल प्रबंधन से मदद की गुहार लगाता रहा।

मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एक यूनिट रक्त उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था, ताकि अन्य व्यवस्था होने तक मरीज का उपचार जारी रह सके। उनका कहना है कि यदि उस समय एक बोतल खून मिल जाता तो शायद दीपिका की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली और युवती की हालत लगातार बिगड़ती गई। अंततः इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मामले के सामने आने के बाद जिला अस्पताल प्रबंधन सवालों के घेरे में आ गया है। सिविल सर्जन डॉ. आशीषसन मिंज ने पूरे प्रकरण की जांच कराने की बात कही है। वहीं ब्लड बैंक प्रभारी जेपी मेश्राम ने कहा कि उन्हें फिलहाल मामले की जानकारी नहीं है और पूरी जानकारी लेने के बाद ही वे कोई प्रतिक्रिया दे पाएंगे।
गौरतलब है कि दुर्ग जिला अस्पताल में नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित होते हैं और बड़ी संख्या में रक्त संग्रहित किया जाता है। ऐसे में यदि रक्त की कमी से जूझ रहे मरीज को समय पर खून नहीं मिल पाता, तो यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों के खिलाफ होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।