दुर्ग। विश्व तंबाकू दिवस के अवसर पर पोटियाकला स्थित गायत्री प्रज्ञा मंदिर द्वारा नशामुक्त समाज के निर्माण के उद्देश्य से दिनभर विविध जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। साफ-सफाई अभियान, निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक और दीप महायज्ञ के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया तथा नशामुक्त जीवन का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह तालाब सफाई अभियान से हुई, जिसमें गायत्री परिवार के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसके बाद आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य शिविर में लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा उन्हें निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। साथ ही योग, प्राणायाम, घरेलू स्वास्थ्य उपायों और तंबाकू एवं अन्य नशों से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान की जानकारी दी गई।


दिन का सबसे आकर्षक कार्यक्रम जागरूकता रैली रही। रैली में नशे की प्रतीकात्मक अर्थी निकाली गई, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शुरुआत में ग्रामीणों को लगा कि किसी व्यक्ति का निधन हो गया है, लेकिन जैसे-जैसे रैली आगे बढ़ी, लोगों को पता चला कि यह “नशे की अर्थी” है। इस अनोखे संदेश ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। रैली के दौरान प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक में नशे की लत से बर्बाद होते परिवारों और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया।

शाम को आयोजित दीप महायज्ञ कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात दीप प्रज्ज्वलित कर उपस्थित लोगों ने नशे के अंधकार को मिटाने और नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। स्थानीय नागरिक अपने घरों से पांच-पांच दीपक लेकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। चारों ओर दीपों की जगमगाहट ने पूरे परिसर को दीपावली जैसा स्वरूप प्रदान कर दिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र को कमजोर करता है। यदि समाज संगठित होकर संकल्प ले, तो नशे जैसी बुराई को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जागरूकता, संस्कार और सामूहिक प्रयासों से नशामुक्त भारत का सपना साकार किया जा सकता है।
