भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से संगठित तरीके से लौह स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में पुरानी भिलाई पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में संलिप्त दो और आरोपियों इन्द्र कुमार पटेल और मदन साहू को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। इसके साथ ही इस हाई-प्रोफाइल स्क्रैप चोरी कांड में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि पिछले चार-पांच महीनों से एक संगठित गिरोह द्वारा भिलाई स्टील प्लांट से लौह स्क्रैप चोरी कर उसे फ्लू डस्ट से भरे वाहनों में छिपाकर बाहर निकाला जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क में क्रेन ऑपरेटरों और परिवहन से जुड़े लोगों की भी भूमिका सामने आई है।
मैग्नेटिक क्रेन से होती थी स्क्रैप की लोडिंग
विवेचना के दौरान पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिले कि गिरफ्तार आरोपी इन्द्र कुमार पटेल और मदन साहू सांई एसोसिएट से जुड़े क्रेन ऑपरेटर हैं। दोनों आरोपी मैग्नेटिक क्रेन की मदद से चोरी किए गए बीएसपी के लोहे को फ्लू डस्ट परिवहन करने वाले वाहनों में लोड करते थे।पुलिस के अनुसार, इससे पहले गिरफ्तार आरोपी रविन्द्र साहू ने पूछताछ में खुलासा किया था कि मुख्य षड्यंत्रकर्ता संजय सिंह के निर्देश पर वह और अन्य साथी मिलकर बीएसपी के स्क्रैप को फ्लू डस्ट के वाहनों में लोड करते थे। इसी खुलासे के बाद पुलिस ने आगे कार्रवाई करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया।
250 टन स्क्रैप और 3.22 करोड़ की संपत्ति जब्त
26 मई को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने हथखोज स्थित ए.के. ट्रेडर्स परिसर में छापा मारकर फ्लू डस्ट के ढेरों में छिपाकर रखी गई करीब 250 टन लौह प्लेट और बीम कटिंग बरामद की थी, जिसकी कीमत लगभग 90 लाख रुपए आंकी गई। इसके अलावा हाईवा, ट्रक, जेसीबी, हाइड्रा समेत अन्य मशीनरी और वाहनों को मिलाकर कुल 3 करोड़ 22 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई थी।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
पुलिस का कहना है कि मामले का मुख्य सूत्रधार संजय सिंह समेत कुछ अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच टीम भी गठित की गई है।
अब तक गिरफ्तार आरोपी
चिंतानंद साहू
जितेश वर्मा
मिथेन ठाकुर
निर्मल सिंह
रविन्द्र साहू
घनश्याम गुप्ता
इन्द्र कुमार पटेल
मदन साहू
दावा जल्द होगा नेटवर्क का खुलासा
पुलिस ने मामले में चोरी, आपराधिक षड्यंत्र और संगठित अपराध से संबंधित गंभीर धाराओं के साथ छत्तीसगढ़ औद्योगिक सुरक्षा अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी हैं। पुलिस का मानना है कि यह केवल चोरी का मामला नहीं बल्कि औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा संगठित रैकेट है, जिसकी परतें अभी और खुल सकती हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।