दुर्ग। जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर के बाहरी क्षेत्र में संचालित एक कथित हॉस्टल परिसर में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पनीर का भंडारण और सप्लाई किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यह कारोबार बिना किसी वैध लाइसेंस और खाद्य विभाग की अनुमति के संचालित किया जा रहा था।

बताया जा रहा है कि अंडा क्षेत्र में शैल देवी महाविद्यालय के सामने स्थित एक भवन में “बॉयज हॉस्टल” के नाम पर अवैध पनीर स्टोरेज बनाया गया था। बाहर हॉस्टल का बोर्ड लगा हुआ था, जबकि अंदर भारी मात्रा में पनीर का भंडारण कर उसकी सप्लाई की जा रही थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने मौके पर दबिश दी।

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने लगभग 140 किलो पनीर जब्त किया, जिसकी बाजार कीमत करीब 50 हजार रुपये बताई जा रही है। जांच के लिए पनीर के नमूने लैब भेजे गए हैं ताकि उसकी गुणवत्ता और मिलावट की पुष्टि की जा सके।
सूत्रों के अनुसार मौके से नोट गिनने की मशीन और एक तिजोरी भी बरामद हुई है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह कारोबार लंबे समय से बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इस तरह का अवैध कारोबार संभव नहीं है।
मामले में संचालक संयम जैन ने अधिकारियों के सामने स्वीकार किया कि वह पहले किसी अन्य स्थान से कारोबार संचालित कर रहा था और हाल के दिनों में उक्त स्थान से पनीर बेचने का काम कर रहा था। हालांकि मीडिया से बातचीत से वह बचता नजर आया।

इस पूरे घटनाक्रम ने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी होती तो इतने बड़े स्तर पर अवैध खाद्य कारोबार नहीं पनपता। फिलहाल विभाग द्वारा आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।