छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव अब केवल युवा नेतृत्व के चयन तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव से पहले संगठन के भीतर मचे घमासान ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी सतह पर ला दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगातार विवादों, पक्षपात के आरोपों और योग्य नेताओं की अनदेखी की शिकायतों के बीच युवा कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी रहे अमित पठानिया को हटा दिया गया है। उनकी जगह फिलहाल डॉ. स्मृति रंजन लेंका को छत्तीसगढ़ का नया प्रभारी बनाया गया है। इस बदलाव को संगठन के भीतर उठे गंभीर विवादों का परिणाम माना जा रहा है।

भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रदेशभर से राष्ट्रीय नेतृत्व तक लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं। आरोप था कि जिला अध्यक्षों के चयन से लेकर प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए बनाई गई हाई-परफॉर्मर सूची तक में निष्पक्षता नहीं बरती गई। कई जिलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले युवाओं को जानबूझकर सूची से बाहर रखा गया, जबकि कुछ नाम राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर शामिल किए गए।
चुनाव के बीच ही होल्ड कर दिए गए थे प्रभारी
सूत्र बताते हैं कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय युवा कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही अमित पठानिया की भूमिका सीमित कर दी थी। उन्हें छत्तीसगढ़ के चुनावी दायित्व से होल्ड कर दिया गया था, ताकि आगे की प्रक्रिया प्रभावित न हो। अब आधिकारिक तौर पर उनके स्थान पर नए प्रभारी की नियुक्ति कर दी गई है। युवा कांग्रेस के जानकारों का कहना है कि किसी संगठनात्मक चुनाव के बीच प्रभारी को हटाया जाना सामान्य घटना नहीं मानी जाती। इससे साफ संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंची शिकायतों को गंभीर माना गया।

45 नामों की सूची पर सबसे बड़ा विवाद
प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अंतिम रूप से तैयार की गई 45 हाई-परफॉर्मर नेताओं की सूची अब सबसे बड़ा विवाद बन गई है। संगठन के भीतर सवाल उठ रहे हैं कि सूची में शामिल कुछ नेताओं की आयु निर्धारित सीमा से अधिक बताई जा रही है, जबकि कई ऐसे युवा नेताओं को बाहर रखा गया है जो वर्षों से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, सूरजपुर सहित कई जिलों के नेताओं ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कुछ स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और पर्चेबाजी तक की नौबत आ चुकी है। राजधानी रायपुर और राजनांदगांव में पहले भी प्रभारी अमित पठानिया के खिलाफ खुला विरोध सामने आ चुका था।
पर्दे के पीछे सक्रिय हैं कांग्रेस के दिग्गज?
युवा कांग्रेस के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि संगठनात्मक चुनाव में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की अप्रत्यक्ष भूमिका बनी हुई है। सार्वजनिक मंचों से भले ही वरिष्ठ नेता युवा कांग्रेस चुनाव को स्वतंत्र प्रक्रिया बताते रहे हों, लेकिन संगठन के भीतर अलग-अलग गुट अपने-अपने समर्थक उम्मीदवारों को प्रदेश अध्यक्ष और कार्यकारिणी में पहुंचाने के लिए सक्रिय बताए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि प्रदेश की भविष्य की राजनीति को देखते हुए कई बड़े नेता अपने विश्वसनीय युवा चेहरों को संगठन में मजबूत स्थिति दिलाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि यह चुनाव केवल युवा कांग्रेस का आंतरिक चुनाव न रहकर कांग्रेस के विभिन्न शक्ति केंद्रों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है।

2028 की तैयारी का पहला पड़ाव माना जा रहा चुनाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव की संगठनात्मक तैयारी का आधार बनेगा। युवा कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष भविष्य में कांग्रेस संगठन का महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है। ऐसे में सभी बड़े नेताओं की नजर इस चुनाव पर टिकी हुई है। कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि जो गुट युवा कांग्रेस में मजबूत होगा, उसे आने वाले वर्षों में टिकट वितरण, आंदोलन और संगठनात्मक नियुक्तियों में भी बढ़त मिल सकती है। इसी कारण प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर मुकाबला बेहद प्रतिष्ठापूर्ण हो गया है।

दिल्ली की नजर अब पूरी प्रक्रिया पर
प्रदेश प्रभारी बदलने के बाद अब राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर पूरी चुनाव प्रक्रिया पर है। संगठन के भीतर उम्मीद जताई जा रही है कि विवादित सूची और शिकायतों की भी समीक्षा हो सकती है, ताकि चुनाव की विश्वसनीयता बनी रहे। हालांकि इस संबंध में अभी तक युवा कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं अब सबकी नजर इस बात पर है कि नया प्रभारी चुनाव प्रक्रिया को विवादों से बाहर निकाल पाता है या नहीं, और प्रदेश अध्यक्ष की अंतिम दौड़ में कौन बाजी मारता है।
