साइबर ठगी के खिलाफ दुर्ग पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इस बार पुलिस ने ऐसे छह युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराकर लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन में मदद की। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर केंद्रीय जेल भेज दिया है।

थाना उतई पुलिस और एसीसीयू टीम की जांच में खुलासा हुआ कि भारत सरकार के समन्वय पोर्टल पर दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों में उपयोग किए गए कई बैंक खाते दुर्ग जिले के लोगों के नाम पर संचालित हो रहे थे। जांच में पाया गया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी की रकम जमा कर दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई और नकदी निकाली गई।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम अन्य लोगों को उपयोग के लिए दिए थे। इसके बदले उन्हें कमीशन के रूप में आर्थिक लाभ मिलता था। साइबर अपराध की दुनिया में ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका उपयोग ठगी की रकम को छिपाने और आगे भेजने के लिए किया जाता है।

30 संदिग्ध खातों की जांच, 6 गिरफ्तार
पुलिस ने अपराध क्रमांक 246/2026 के तहत 30 संदिग्ध खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। बैंक के केवाईसी दस्तावेज, ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड खंगालने पर छह खाताधारकों की संलिप्तता सामने आई, जिन्हें 16 जून को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम और बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। मामले में आगे भी जांच जारी है और अन्य संदिग्ध खाताधारकों की भूमिका खंगाली जा रही है।

ये आरोपी गिरफ्तार
भूपेन्द्र हिरवानी (सुपेला)
नवलेश्वर पाटले (सुपेला)
पवन सिंह (कैंप-1, भिलाई)
आकाश चंद्राकर (रिसाली)
अर्पण शुक्ला (तितुरडीह, दुर्ग)
मुकेश सिंह (सेक्टर-7, भिलाई)
पासबुक, एटीएम और सिम जब्त
पुलिस की चेतावनी
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या मोबाइल सिम उपयोग के लिए न दें। ऐसा करना साइबर अपराध में सहभागिता माना जा सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
