दुर्ग। जिले में सामने आए अवैध अफीम खेती के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दुर्ग ग्रामीण युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जयंत देशमुख ने इस पूरे प्रकरण में पुलिस की क्राइम ब्रांच और इंटेलिजेंस तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर अवैध अफीम खेती का सामने आना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
जयंत देशमुख ने बताया कि जिले में अपराध नियंत्रण के लिए क्राइम ब्रांच की कुल पांच टीमें सक्रिय बताई जाती हैं—दो टीमें ग्रामीण क्षेत्र (धमधा और पाटन), एक दुर्ग, एक भिलाई नगर और एक छावनी क्षेत्र में तैनात है। इसके बावजूद कई एकड़ में अवैध अफीम की खेती का खुलासा होना यह दर्शाता है कि निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।

उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों के अनुसार 3 मार्च को ही पूरे गांव में अफीम खेती की चर्चा फैल गई थी। इसके बाद 5 मार्च को समोदा के सरपंच द्वारा पुलिस को फोटो भेजकर सूचना दी गई, लेकिन उस समय कथित तौर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। देशमुख के मुताबिक 6 मार्च को LIB को सूचना मिलने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ।
देशमुख ने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो मुख्य आरोपी फरार नहीं हो पाते। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में विभिन्न इंटेलिजेंस इकाइयों—LIB, SB, SIB, IB और ACCU—की भूमिका पर भी सवाल खड़े होते हैं और पूरे मामले की गहन समीक्षा की आवश्यकता है।

उन्होंने बताया कि इस मामले के मुख्य आरोपी श्रवण विश्नोई और अचलाराम जाट अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार आरोपियों की तलाश में ACCU और धमधा पुलिस की टीम राजस्थान के जोधपुर तक पहुंची, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।
जयंत देशमुख ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में समय रहते प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि प्रदेश में नशे से जुड़े अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
(समाचार लिखते समय पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठने के कारण जिले के पुलिस कप्तान पर भी कार्रवाई की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।)