Active women's union came out on the road in the pouring rain to submit a memorandum to the collector regarding their eight demands. Know the whole matter
संभाग कार्यालय के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन
दुर्ग में बारिश के बीच सक्रिय महिलाओं का एक दिवसीय धरना संपन्न हुआ और धरने के बाद बारिश में भीगते हुए कलेक्टर ऑफिस तक रैली निकाली गई तथा मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, मुख्य सचिव, पंचायत सचिव, बिहान संचालक के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। इसके पश्चात जनपद अध्यक्ष कुलेश्वरी देवांगन, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे से मिलकर महिलाओं ने अपनी समस्याएं रखी।
सक्रिय महिला संघ ने अपनी आठ मांगों को लेकर आज दुर्ग के गांधी चौक में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया उन्होंने बताया कि सरकार से उनकी प्रमुख मांगे क्या है। जिसमें सर्वप्रथम मानदेय 1910 रु. प्रतिमाह बहुत ही कम है, इसे जीने लायक सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाया जाए। 2 मानदेय ‘छत्तीसगढ़ शासन न्यूनतम वेतन अधिनियम’ के अनुसार दिया जाए। 3.कई वर्षों से कार्यरत सक्रिय महिलाओं को जबरदस्ती कार्य से हटाया जा रहा है जो पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। इसे बंद किया जाए। 4.लोकोस vprp लखपति दीदी का ऑनलाइन कार्य का पैसा जल्द से जल्द दिया जाए। 5.सभी कैडरो को मोबाइल दिया जाए नेट खर्च, दैनिक भत्ता व यात्रा भत्ता दिया जाए।6.मानदेय प्रतिमाह दिया जाए। इसे सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाए। 7.हमें नियुक्ति पत्र दिया जाए। 8.नियमितिकरण किया जाए।

प्रांताध्यक्ष पदमा पाटिल ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि कई वर्षों से कार्यरत सक्रिय महिलाओं को जबरदस्ती कार्य से हटाया जा रहा है जो पूरी तरह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। 15 अगस्त स्वाधीनता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनआरएलएम के कार्यों और उपलब्धियों की प्रशंसा की है उसका वास्तविक श्रेय सक्रिय महिलाओ को हैं। लेकिन हमें बहुत कम मानदेय दिया जाता है। पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में सक्रिय महिलाओं को 6000/- प्रतिमाह दिया जाता है जिसमें केंद्र व राज्य से तीन तीन हजार दिया जाता है। तो फिर छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं दिया जाता है।
प्रांतीय सलाहकार विश्वजीत हारोडे ने कहा कि शासन सक्रिय महिलाओं का शोषण कर रही है। सरकार एक तरफ नारी शक्ति की बात करती है लेकिन दूसरी ओर इतने कम मानदेय में काम कराया जाता है कि उससे अधिक शासन के कार्य में खर्च हो जाता है।
सुरेखा बंजारे ने कहा कि हमारे निजी मोबाइल में ऑनलाइन काम कराया जाता है। ₹1910 मानदेय में हम 15000रु के मोबाइल में 350 रुपए का नेट चार्ज खर्च कर कैसे काम करें।
धमधा ब्लॉक से सबरजीत सिंह ने कहा कि लगातार ट्रेनिंग मीटिंग आदि के लिए कई बार जनपद या क्लस्टर आना जाना पड़ता है जिसका कोई यात्रा भत्ता नहीं दिया जाता।
जेवरा की हेमकुमारी डहरिया ने लोकोस, vprp एवं लखपति दीदी का ऑफलाइन व ऑनलाइन कार्य की प्रोत्साहन राशि शासन के द्वारा निर्धारित होने के बावजूद अधिकतर जिलों में सक्रिय महिलाओं को नहीं दी गई है एवं जहां भी दी गई है वहां पर भी पूरी नहीं दी गई हैं। साथ ही रेशमा, भानुमति साहू और सरोजिनी गायकवाड़ ने भी अपना वक्तव्य रखा।