खेतों में उपयोग होने वाले लोहे के पिंजरेनुमा (आयरन केजव्हील) पहियों वाले ट्रैक्टर अब सामान्य सड़कों पर नहीं चल सकेंगे। परिवहन विभाग ने ऐसे ट्रैक्टरों के सड़क पर संचालन पर सख्ती के निर्देश जारी करते हुए सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को चालानी कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि ऐसे ट्रैक्टर न केवल मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचाते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ाते हैं।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आयरन केजव्हील केवल खेतों में कृषि कार्य के लिए बनाए गए हैं। इन्हें डामर, सीमेंट की सड़कों या राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलाना नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में किसान इन्हीं पहियों के साथ ट्रैक्टर लेकर सड़कों पर निकलते हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त होती हैं। लोक निर्माण विभाग ने भी ऐसे ट्रैक्टरों से सड़कों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई है। विभाग के अनुसार लोहे के पहिए सड़क की सतह को तेजी से खराब करते हैं, जिससे मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च आता है और अन्य वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा होता है।


परिवहन विभाग ने जिला प्रशासन के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। किसानों और वाहन चालकों को बताया जाएगा कि आयरन केजव्हील का उपयोग केवल खेतों तक सीमित रखें तथा सड़क पर निकलने से पहले रबर टायर लगाना अनिवार्य है। इसके साथ ही स्थानीय समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। विभाग ने संकेत दिए हैं कि अभियान के दौरान नियम तोड़ने वाले वाहनों पर तत्काल चालानी कार्रवाई की जाएगी।

