छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ–महासंघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। कार्यपालक निदेशक, दुर्ग क्षेत्र कार्यालय के मुख्य द्वार पर आयोजित विशाल द्वार सभा में बड़ी संख्या में बिजली कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और चेतावनी दी कि यदि जल्द मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो अगस्त से प्रदेशभर में कामबंद आंदोलन की स्थिति बन सकती है।

सभा के बाद महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने कार्यपालक निदेशक, दुर्ग क्षेत्र को 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें पुरानी पेंशन योजना लागू करने, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, वेज रिवीजन, अंतरिम राहत, तीन प्रतिशत तकनीकी भत्ता, कंप्यूटर भत्ता, नई भर्ती, लंबित पदोन्नति तथा बाह्य स्रोत के ठेका श्रमिकों को सीधे भुगतान और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
महासंघ ने क्षेत्रीय स्तर की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए द्विपक्षीय वार्ता आयोजित करने की भी मांग की। इस पर कार्यपालक निदेशक ने शीघ्र बैठक बुलाकर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

द्वार सभा का संचालन महासंघ के प्रांतीय संयुक्त महामंत्री शिवेंद्र दुबे ने किया। सभा को भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय उपमहामंत्री हरीश चौहान, छत्तीसगढ़ विद्युत सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी संघ महासंघ के महामंत्री अरुण देवांगन, क्षेत्रीय अध्यक्ष ए.के. देवांगन, पूर्व प्रांतीय अध्यक्ष बी.एस. राजपूत, पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष धर्मेंद्र श्रीवास्तव, तकनीकी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष देवकुमार बंजारे तथा महामंत्री हेमंत साहू ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कर्मचारियों की मांगों को न्यायोचित बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित मुद्दों का समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने सभी कर्मचारियों से 10 जुलाई को रायपुर स्थित डंगनिया मुख्यालय में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया।

महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि प्रबंधन ने कर्मचारियों की जायज मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो अगस्त माह से पावर कंपनी में कामबंद आंदोलन शुरू किया जा सकता है। ऐसी स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।

