दुर्ग जिले के अंडा थाना क्षेत्र के ग्राम चिंगरी में बिजली विभाग की कथित लापरवाही ने एक किसान की जान ले ली। खेत में काम करने गए 60 वर्षीय बिरेन्द्र देशमुख की करंट लगने से मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करने के बजाय ग्रामीण शव को लेकर बिजली विभाग के अंडा कार्यालय पहुंचे और करीब चार से पांच घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया।

जानकारी के अनुसार, बिरेन्द्र देशमुख शनिवार सुबह करीब 10 से 11 बजे के बीच अपने खेत में काम करने गए थे। इसी दौरान वे करंट की चपेट में आ गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। दोपहर करीब एक बजे घटना की सूचना अंडा पुलिस को मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मर्ग कायम किया और पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल दुर्ग भेजा। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस बिजली पोल के पास हादसा हुआ, उसके झुके होने की शिकायत करीब दो वर्ष पहले विभाग को लिखित रूप से की गई थी, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी लापरवाही के कारण एक किसान की जान चली गई।

लोहे के घेरे में दौड़ रहा था करंट
ग्रामीणों का कहना है कि झुके हुए बिजली पोल के कारण तार नीचे आ गए थे। विभाग ने स्थायी मरम्मत करने के बजाय उन्हें लोहे के घेरे से बांध दिया था। समय के साथ केबल में खराबी आने से उसी लोहे के घेरे में करंट प्रवाहित होने लगा और किसान उसकी चपेट में आ गया।
बारिश में भी नहीं हटे ग्रामीण
पोस्टमार्टम के बाद ग्रामीणों ने शव को बिजली विभाग कार्यालय के सामने रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर डटे रहे और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने रखीं मांगें
मृतक के परिजनों को उचित आर्थिक मुआवजा।
परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
जिम्मेदार बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई।
पूरे मामले की तकनीकी जांच कर दोष तय किया जाए।
जिले में ऐसे जर्जर बिजली पोल और खतरनाक विद्युत व्यवस्थाओं की तत्काल जांच हो।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च पुलिस अधिकारी, अंडा थाना प्रभारी श्रद्धा पाठक और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। वहीं बिजली विभाग से भी पूरे मामले पर जवाब तलब किया गया है।यदि ग्रामीणों के अनुसार दो वर्ष पहले ही झुके पोल और खतरनाक बिजली व्यवस्था की शिकायत विभाग को मिल चुकी थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किया गया? यह सवाल अब पूरे मामले का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।

