महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा दुर्ग में श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ निकाली गई। तमेरपारा स्थित किल्ला मंदिर और रेलवे स्टेशन के सामने स्थित श्री रामजानकी आमदी मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को सुसज्जित रथों में विराजमान कर यात्रा निकाली गई। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रसाद ग्रहण किया।

तमेरपारा स्थित किल्ला मंदिर से निकली रथयात्रा चंडी मंदिर सहित आसपास के क्षेत्रों का भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रथ को आगे बढ़ाने में भागीदारी निभाई। पूरे मार्ग में भक्ति गीतों और जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की भी व्यवस्था की गई थी।
वहीं, रेलवे स्टेशन स्थित श्री रामजानकी आमदी मंदिर से दोपहर बाद रथयात्रा निकाली गई। यात्रा स्टेशन चौक, अग्रसेन चौक, पोलसायपारा, इंदिरा मार्केट, पटेल चौक, बस स्टैंड, सिंधी कॉलोनी सहित विभिन्न मार्गों से होकर पुनः मंदिर पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और महाप्रभु का रथ खींचने के लिए उत्साह दिखाई दिया।


180 वर्ष पुरानी परंपरा आज भी कायम
पूर्व महापौर शंकरलाल ताम्रकार ने बताया कि किल्ला मंदिर से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की परंपरा लगभग 180 वर्ष पुरानी है। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक रथयात्रा की सबसे खास बात यह है कि रथ में रस्सी नहीं बांधी जाती। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु वर्षों पुराने रथ को पीछे से धक्का देकर आगे बढ़ाते हैं, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाया जा रहा है।
आमदी मंदिर से भी दशकों पुरानी परंपरा
रेलवे स्टेशन स्थित श्री रामजानकी आमदी मंदिर से भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा कई दशकों से निकाली जा रही है। इस वर्ष भी परंपरा के अनुरूप रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली और विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान का स्वागत कर पूजा-अर्चना की।
रथयात्रा के दौरान पूरे शहर में भक्ति और उत्सव का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ महाप्रभु से सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

