आज के डिजिटल युग में जहाँ ऑनलाइन पेमेंट ने व्यापार को आसान बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने व्यापारियों को ठगने और उन्हें कानूनी पचड़े में फंसाने का एक नया हथियार ढूंढ निकाला है…’म्यूल खाता’ (Mule Account)। इस गंभीर खतरे को लेकर दुर्ग जिला पुलिस प्रशासन और कैट (CAIT) व सराफा एसोसिएशन ने हाथ मिलाया है। एक विशेष जागरूकता शिविर में खुद दुर्ग पुलिस अधीक्षक (SP) विजय अग्रवाल ने चौंकाने वाले आँकड़े साझा करते हुए जिले को साइबर क्राइम के मामले में ‘रेड अलर्ट’ पर बताया है। इस शिविर में कैट दुर्ग इकाई की महिला और युवा विंग सहित शहर के लगभग 450 से अधिक व्यापारियों ने हिस्सा लिया।

खौफनाक आँकड़ा—25 हजार से अधिक संदिग्ध खाते
एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर ने ‘म्यूल खाते’ के पूरे मकड़जाल को समझाया। उन्होंने बताया कि साइबर ठगी का पैसा जिस पहले बैंक खाते में ट्रांसफर होता है, उसे ‘प्राइमरी म्यूल खाता’ कहते हैं। इसके बाद पुलिस कप्तान विजय अग्रवाल ने जिले के जो आँकड़े रखे, उसने व्यापारियों के होश उड़ा दिए। उन्होंने बताया कि दुर्ग जिले में वर्तमान में 3,150 प्राइमरी म्यूल खाते चिन्हित किए जा चुके हैं। इन प्राथमिक खातों से आगे जिन 2 से 12 अन्य खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, उनकी कड़ियाँ जोड़ें तो जिले में 25,000 से ज्यादा संदिग्ध खाते पुलिस के रडार पर हैं।
खाता फ्रीज होने का खतरा
उन्होंने बताया कि ठगी का पैसा चाहे छोटा हो या बड़ा, जिस भी खाते में जाएगा, पुलिस उसे तुरंत फ्रीज (Block) कर देगी।आज देश के कोने-कोने (कर्नाटक, गोवा, हरियाणा, बिहार आदि) की पुलिस दुर्ग के इन म्युल खाताधारकों तक पहुँच रही है।
खाता फ्रीज हो तो क्या करें?
एसपी विजय अग्रवाल ने कारोबारियों को सुरक्षा चक्र देते हुए बताया कि अनजान ग्राहकों से पेमेंट लेते वक्त सावधानी ही एकमात्र बचाव है। अगर कोई अनजान व्यक्ति आपकी दुकान से सामान खरीदकर किसी तीसरे के खाते से ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करता है, तो तुरंत उस ग्राहक के आधार कार्ड और पैन कार्ड की कॉपी अपने पास रख लें। अगर भविष्य में आपका खाता फ्रीज होता है, तो ये दस्तावेज पुलिस जांच में आपको तुरंत क्लीन चिट दिलाएंगे और आपका खाता जल्दी खुल जाएगा। पुलिस ऐसे मामलों को कोर्ट में पेश करती है, जहाँ आप इन सबूतों के आधार पर खुद को निर्दोष साबित कर राहत पा सकते हैं।


डिजिटल लेन-देन के सुरक्षित नियम
शिविर में पुलिस के आला अधिकारियों की टीम ने व्यापारियों की क्लास ली और उनके सवालों के सीधे जवाब दिए। साइबर सब-इंस्पेक्टर डॉ. संकल्प राय ने ‘इमर्जिंग साइबर फ्रॉड्स का लाइव डेमो दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल ट्रांजैक्शन कैसे करें और ठगी होने पर किस पोर्टल पर और कैसे तुरंत क्राइम रिपोर्टिंग करें। पुलिस इंस्पेक्टर प्रशांत मिश्रा ने बैंक खातों की प्राइवेसी और पासवर्ड को सुरक्षित रखने के तकनीकी तरीके साझा किए। डीएसपी (क्राइम ब्रांच) यदुमणि सिधर ने एक बेहद इंटरैक्टिव सेशन लिया, जिसमें व्यापारियों की शंकाओं और पेमेंट होल्ड होने से जुड़े कानूनी सवालों का समाधान किया।
इंदिरा मार्केट पार्किंग की समस्या पर कल ‘जॉइंट मीटिंग’
जागरूकता सत्र के समापन पर इंदिरा मार्केट एसोसिएशन के बहादुर थारानी और आशीष निमजे ने शहर के सबसे बड़े बाजार की गंभीर प्रशासनिक समस्या को एसपी के सामने रखा। उन्होंने शिकायत की कि निगम द्वारा बाजार के पार्किंग स्थल का ठेका जिस प्राइवेट ठेकेदार को दिया जाता है, वह अतिरिक्त कमाई के चक्कर में उस जगह पर पसरा लगाने वालों को किराये पर दे देता है। इसके कारण ग्राहकों की गाड़ियाँ खड़ी करने की जगह नहीं बचती और सीधे व्यापार पर असर पड़ रहा है। एसपी विजय अग्रवाल ने इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए आश्वस्त किया कि वे निगम और पुलिस की एक ‘जॉइंट मीटिंग’ तय कर इस समस्या का स्थाई खात्मा करेंगे।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम को सफल बनाने में कैट दुर्ग इकाई टीम के प्रदेश प्रभारी (MSME) मोहम्मद अली हिरानी, चेयरमैन पवन बडजात्या, कैट अध्यक्ष प्रकाश सांखला, महामंत्री प्रकाश गोलछा, सह महामंत्री विनय कश्यप, कोषाध्यक्ष हरीश श्रीश्रीमाल, युवा कैट अध्यक्ष रवि केवलतानी, महामंत्री आशीष खंडेलवाल, महिला अध्यक्ष पायल जैन, महामंत्री गुंजा पिंचा, रेखा रूपारेल, प्रतिभा पुरोहित, प्रीति सोनी, राजा कांकरिया, ऋषभ देशलहरा, किशोर बागमार, प्रफुल्ल टाटीया, पूरण सांखला, कमल भंडारी, मांगीलाल सोनी, भागवत सोनी और ललित खापर्डे सहित बड़ी संख्या में सराफा और कपड़ा व्यापारी उपस्थित रहे।

