साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच दुर्ग पुलिस ने एक बड़े संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। छावनी थाना पुलिस ने ऐसे 23 लोगों को चिन्हित किया है, जो कथित तौर पर साइबर ठगों को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते उपलब्ध कराकर करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन में मदद कर रहे थे। पुलिस ने 15 आरोपियों को हिरासत में लिया है, जबकि 8 लोगों को पूछताछ के बाद बीएनएसएस की धारा 35(1) के तहत नोटिस देकर छोड़ा गया है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस को पूरे नेटवर्क के देशव्यापी होने की आशंका है।

क्या होता है म्यूल अकाउंट?
साइबर अपराधी ठगी की रकम सीधे अपने खाते में नहीं मंगाते। इसके लिए वे कमीशन देकर दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। ठगी की रकम पहले इन खातों में आती है और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
तकनीकी जांच से खुला नेटवर्क
थाना छावनी में दर्ज अपराध की विवेचना के दौरान पुलिस ने बैंक खातों के लेनदेन, तकनीकी साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन लेकर अपने बैंक खाते साइबर एवं आर्थिक अपराधियों को उपलब्ध करा रहे थे। 29 जून को पुलिस ने एक साथ कार्रवाई करते हुए कुल 23 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जांच में कई आरोपियों ने कमीशन के बदले खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की है।


मोबाइल, एटीएम, पासबुक और चेकबुक जब्त
11 मोबाइल फोन
3 एटीएम कार्ड
3 बैंक पासबुक
3 चेकबुक
3 आधार कार्ड
अन्य बैंकिंग एवं इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज
जब्त किए गए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच के साथ बैंक ट्रांजेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है।
अभी और बड़े खुलासे संभव
पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम करते थे। इनके जरिए साइबर ठगी करने वाले मुख्य गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन खातों में कितनी राशि आई, किन राज्यों से ट्रांजेक्शन हुए और इसके पीछे कौन-सा संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

शहर के कई इलाकों से जुड़े आरोपी
कार्रवाई में खुर्सीपार, छावनी, वैशाली नगर, स्मृति नगर, कोहका, सुपेला, कैंप-2 और अन्य क्षेत्रों के लोगों के नाम सामने आए हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क किसी एक मोहल्ले तक सीमित नहीं था। दुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि लालच या कमीशन के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल सिम या अन्य बैंकिंग दस्तावेज किसी को भी उपलब्ध न कराएं। यदि आपका बैंक खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होता है, तो खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है।
