दुर्ग। दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण के माध्यम से स्वीकृत लगभग 40 बोर खनन एवं हैंडपंप स्थापना कार्यों में कथित अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। इस संबंध में आरटीआई कार्यकर्ता एवं शिकायतकर्ता उपेन्द्र कुमार ने मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर दुर्ग तथा संबंधित अधिकारियों को शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है।

शिकायत के अनुसार प्रत्येक बोर खनन एवं हैंडपंप स्थापना कार्य की लागत लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये स्वीकृत की गई थी। इस प्रकार 40 कार्यों पर करीब 60 लाख रुपये खर्च किए जाने थे। आरोप है कि स्वीकृत प्राक्कलन में प्रत्येक कार्य के लिए 5 एचपी मोटर पंप की स्थापना हेतु लगभग 43,300 रुपये का प्रावधान रखा गया था, लेकिन अधिकांश स्थानों पर केवल हैंडपंप स्थापित कर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया तथा मोटर पंप और अन्य आवश्यक सामग्री नहीं लगाई गई।

शिकायतकर्ता उपेन्द्र कुमार का कहना है कि यदि प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं हुए हैं तो इससे लाखों रुपये की शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका बनती है। उन्होंने आरोप लगाया है कि संबंधित कार्य गुणवत्ताहीन एवं तकनीकी मानकों के विपरीत कराए गए हैं, जिससे सरकारी धन की बंदरबांट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

उपेन्द्र कुमार के मुताबिक प्रारंभिक गणना में लगभग 16 लाख रुपये की अनियमितता सामने आ रही है। उन्होंने मांग की है कि सभी कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण, भौतिक सत्यापन (स्पॉट वेरिफिकेशन) तथा वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक शेष भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जिन कार्यों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है, उनकी भी पुनः जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों, ठेकेदारों अथवा एजेंसियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाए तथा शासकीय राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय सहित जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को भेजी गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।