जिला अस्पताल दुर्ग में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित 22 वर्षीय युवती दीपिका गाड़ा की उपचार के दौरान हुई मौत के मामले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक अरुण वोरा ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
अरुण वोरा ने कहा कि दीपिका गाड़ा की मृत्यु केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली घटना है। यदि परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोप सही हैं और गंभीर स्थिति में भी मरीज को समय पर एक यूनिट रक्त उपलब्ध नहीं कराया गया, तो यह अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और वे स्वयं पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। परिवार को न्याय मिलना चाहिए और राज्य सरकार को तत्काल उचित शासकीय मुआवजा प्रदान करना चाहिए, ताकि इस कठिन समय में उन्हें कुछ राहत मिल सके।

पूर्व विधायक वोरा ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। सरकारी अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, दवाइयों और आपातकालीन सुविधाओं की कमी आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन रही है। सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए गंभीर और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी मरीज को रक्त, दवा या अन्य आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में अपनी जान गंवानी पड़े, यह किसी भी संवेदनशील समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकता। पूरे मामले की उच्च स्तरीय और स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें और दोषियों पर कार्रवाई हो सके।
अरुण वोरा ने मांग की कि जिला अस्पताल सहित प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक समीक्षा की जाए। रक्त उपलब्धता की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए तथा स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने कहा कि दीपिका को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन यह सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी दर्दनाक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।