दुर्ग पुलिस ने साइबर और आर्थिक अपराधों से जुड़े एक बड़े संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए म्यूल अकाउंट कारोबार के मास्टरमाइंड को उसके दो साथियों सहित गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर देशभर के साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने और करोड़ों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन में मदद करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी मनोज कुमार भुतड़ा वर्ष 2022 से अवैध रूप से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों और आर्थिक अपराधियों को बेचने का काम कर रहा था। आरोपी अब तक करीब 200 से अधिक म्यूल अकाउंट अलग-अलग बैंकों में खुलवाकर सप्लाई कर चुका है।
5 हजार में सेविंग, 50 हजार में करंट अकाउंट
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी साधारण बैंक खाते 15 से 20 हजार रुपए और करंट अकाउंट 40 से 50 हजार रुपए में बेचते थे। पुलिस के मुताबिक आरोपी इंडसइंड बैंक, आईडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक सहित कई बैंकों में खाते खुलवाते थे। इन खातों में करोड़ों रुपए के लेनदेन की जानकारी सामने आई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपी खाता खुलवाने के लिए न्यूनतम बैलेंस की राशि भी खुद उपलब्ध कराता था और बाद में रकम वापस निकाल लेता था।
गाजियाबाद, सूरत और रायपुर पुलिस के भी वांटेड
दुर्ग पुलिस को सूचना मिली थी कि जगदलपुर का मनोज भुतड़ा अपने साथियों के साथ म्यूल अकाउंट से जुड़ा सामान लेकर भिलाई पहुंचा है। इसके बाद सुपेला और एसीसीयू टीम ने सुपेला ओवरब्रिज के पास घेराबंदी कर आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 पासबुक, 7 एटीएम कार्ड, 3 फिनो पेमेंट किट, 3 आधार कार्ड और एक पैन कार्ड जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी गाजियाबाद, सूरत, रायपुर और जगदलपुर पुलिस को भी कई मामलों में वांछित था।
बैंक होल्ड हटवाकर खुद निकालता था रकम
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मास्टरमाइंड इतना शातिर था कि बड़े ट्रांजेक्शन वाले खातों को पहले होल्ड करवाता और बाद में बैंक से संपर्क कर होल्ड हटवाकर रकम खुद निकाल लेता था। मामले में केवल सेठिया और सत्यनारायण सेठिया को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में अलग-अलग टीम रवाना कर चुकी है।