दुर्ग। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला सड़क परियोजना जहां एक ओर देशभर में बेहतर सड़क सुविधाएं देने के उद्देश्य से बनाई जा रही है, वहीं दुर्ग जिले के थनौद क्षेत्र में यह परियोजना ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रही सड़क से प्रभावित गांवों के किसान और ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर 11 मार्च से ग्राम थनौद में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।

अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे किसान और ग्रामीण आज थनौद से रैली के रूप में अंजोरा पहुंचे और अंजोरा में सभा का आयोजन किया। जिसमें ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा साथ ही कहा गया कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती आंदोलन चलता रहेगा। और आगे चलकर उग्र रूप में आंदोलन को गति दिया जाएगा। इसके बाद अंजोरा मुख्य मार्ग पर सांकेतिक चक्का जाम के लिए हजारों की संख्या में महिला पुरुष सड़क में उतर गए। पुलिस प्रशासन ने गाड़ियों को अलग-अलग मार्गो में डायवर्ट कर दिए थे। चक्का जाम के बाद जिला प्रशासन से उपस्थित नायब तहसीलदार को मांग पत्र सोपा गया।
ग्रामीणों के आक्रोश का कारण सड़क निर्माण के दौरान बनाए जा रहे पुल की कम ऊंचाई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल की ऊंचाई इतनी कम रखी गई है कि वहां से कृषि कार्य में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, हार्वेस्टर सहित बड़ी मूर्तियां और अन्य भारी वाहन निकालना संभव नहीं होगा। इससे किसानों के दैनिक कार्यों और धार्मिक आयोजनों में भी बड़ी परेशानी खड़ी हो जाएगी।
ग्रामीणों की दूसरी प्रमुख मांग यह है कि नदी से लगभग 500 मीटर तक गोड़ा (ऊंचा बांधनुमा मार्ग) बनाकर सड़क का निर्माण किया जाए, ताकि बरसात के समय बाढ़ का पानी आसानी से निकल सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो बाढ़ की स्थिति में गांव और खेतों की फसलें पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।

ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि वे पिछले दो वर्षों से लगातार शासन-प्रशासन को आवेदन और ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से अवगत करा रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे पहले हुए आंदोलन के दौरान भी प्रशासन की ओर से मांगों पर विचार कर समाधान करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसके बावजूद बिना समाधान के ही भारतमाला सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया।
इससे नाराज ग्रामीणों ने 11 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी और सड़क निर्माण का कार्य बंद करवा दिया। इसी क्रम में आज आक्रोशित ग्रामीणों ने अंजोरा मुख्य मार्ग पर लगभग आधे घंटे तक चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 28 मार्च तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर समाधान नहीं किया गया, तो वे अंजोरा हाईवे बाईपास को पूरी तरह से जाम कर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की जरूरतों और समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है।
इस दौरान प्रमुख रूप से अनिल देवांगन, भीमेश्वर सिन्हा,उमेंद्र सिन्हा, सियाराम निषाद, कृष्णा निषाद, हुमत धनकर, पुराणिक साहू, डॉक्टर कमल सिन्हा,कुमारेश्वर देवांगन, सतीश देवांगन, मोहन हरमुख,जयंत देशमुख, जनपद सदस्य हिरेंद्र,दीप सारस्वत सहित थनौद बिरेझर, चंगोरी, अंजोरा के हजारों किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।