दुर्ग संभागीय मुख्यालय स्थित 500 बिस्तरों वाले जिला अस्पताल में डॉक्टरों और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर कांग्रेस के पूर्व पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। पूर्व पार्षदों का आरोप है कि अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि गंभीर मरीजों को उपचार के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।

कांग्रेस के पूर्व पार्षदों देवकुमार जंघेल, लिखन साहू, अमृत लोढ़ा, संजय सिंह, भोला महोबिया, मनोज चंद्राकर, मनीष यादव, डॉ. छत्रसाल गायकवाड, राजकुमार वर्मा और युवराज ठाकुर सहित अन्य ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उन्होंने जिला अस्पताल का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से बातचीत की। उनके अनुसार, अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का दावा
पूर्व पार्षदों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। उनका कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बड़े सरकारी अस्पताल में ही पर्याप्त विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होंगे तो दूरदराज से आने वाले मरीजों को समुचित उपचार कैसे मिलेगा।

जांच और दवाओं की सुविधा पर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई मरीजों को आवश्यक जांच के लिए निजी केंद्रों का रुख करना पड़ता है। इसी तरह कुछ जरूरी दवाएं और इंजेक्शन भी बाहर से खरीदने की शिकायतें मरीजों की ओर से सामने आने का दावा किया गया।
डॉक्टरों की कमी दूर करने की मांग
पूर्व पार्षदों ने कहा कि जिला अस्पताल पर लगातार बढ़ रहे मरीजों के दबाव को देखते हुए चिकित्सकों के रिक्त पदों को तत्काल भरा जाना चाहिए। इसके साथ ही अस्पताल में आवश्यक जांच सुविधाएं, दवाएं और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर मरीजों को बेहतर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने की मांग की। हालांकि, डॉक्टरों के ड्यूटी के दौरान निजी प्रैक्टिस करने और अन्य आरोपों के संबंध में संबंधित विभाग या अस्पताल प्रबंधन का पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है।

