धमधा के ग्राम खैरझिटी के जर्जर शासकीय विद्यालय भवन को डिस्मेंटल कर नए भवन के निर्माण की मांग को लेकर किसान बंधु संगठन धमधा ब्लॉक ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि विद्यालय भवन लंबे समय से जर्जर और खतरनाक स्थिति में है, इसके बावजूद विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अब तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

किसान बंधु संगठन धमधा ब्लॉक की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) धमधा को सौंपे गए पत्र में बताया गया है कि जर्जर स्कूल भवन के कारण विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। पत्र के अनुसार, भवन की खराब स्थिति को देखते हुए करीब तीन वर्षों से विद्यालय का संचालन पंचायत भवन में किया जा रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि विद्यालय भवन को डिस्मेंटल कर नए भवन के निर्माण की दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने यह भी उल्लेख किया है कि हाल में जारी डिस्मेंटल सूची में भी विद्यालय का नाम शामिल नहीं किया गया है।

15 अगस्त को सांकेतिक विरोध की चेतावनी
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि शीघ्र आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान किसान बंधु संगठन, ग्रामवासी और बच्चों के अभिभावक सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे। संगठन के अनुसार, इस दौरान धमधा से विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय तक प्रभात फेरी निकालकर और तिरंगा झंडा हाथ में लेकर अपनी मांग प्रशासन के समक्ष रखी जाएगी।

17 अगस्त से पेड़ के नीचे पढ़ाई कराने की बात
संगठन ने पत्र के माध्यम से यह भी कहा है कि 17 अगस्त से ग्राम खैरझिटी में बच्चों की पढ़ाई विद्यालय परिसर के बाहर पेड़ के नीचे सांकेतिक रूप से शुरू कराई जाएगी। पत्र में कहा गया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक जर्जर विद्यालय भवन को डिस्मेंटल कर नए भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान नहीं की जाती।
संगठन ने अपने प्रस्तावित आंदोलन को शांतिपूर्ण बताते हुए इसे विद्यार्थियों की सुरक्षित शिक्षा और शिक्षा के अधिकार से जुड़ी मांग करार दिया है। ज्ञापन की प्रतिलिपि धमधा थाना प्रभारी, जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग और विकासखंड शिक्षा अधिकारी धमधा को भी सौंपे जाने का उल्लेख पत्र में किया गया है।

सुरक्षित भवन की मांग पर बढ़ा दबाव
खैरझिटी के जर्जर स्कूल भवन का मामला अब प्रशासन के लिए भी गंभीर चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर संगठन और ग्रामीण बच्चों की सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने जर्जर भवन की स्थिति का तकनीकी परीक्षण और नए भवन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है।
