स्मार्ट मीटर के बाद बिजली बिल 4 गुना बढ़ा, खाने के तेल की कीमतों ने छीना जायका; प्रेमलता साहू ने साधा निशाना
दुर्ग। प्रदेश में बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है। एक तरफ जहाँ रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘स्मार्ट मीटर’ लगते ही बिजली के बिलों ने उपभोक्ताओं को ज़ोर का झटका दिया है। बढ़ती महंगाई और बिजली के भारी भरकम बिलों को लेकर जनआक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता/नेत्री प्रेमलता साहू ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि “प्रदेश के इतिहास में इतनी महंगाई कभी देखने को नहीं मिली। आज स्थिति यह हो गई है कि आम मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए महीने का राशन और बिजली बिल चुकाना भी चुनौती बन गया है।”
महंगाई की दोहरी मार: कारण और आंकड़े
मद
स्थिति / प्रभाव
बिजली बिल
पिछले 4 महीनों में उपभोक्ता बिलों में 3x से 4x वृद्धि
स्मार्ट मीटर
अचानक रीडिंग बढ़ने और तेज मीटरिंग की शिकायतें
खाद्य तेल (Edible Oil)
बीते एक महीने में कीमतों में भारी उछाल
सरकारी योजना का प्रभाव
हाफ बिजली बिल योजना बंद होने का अतिरिक्त बोझ
बिजली बिल का ‘चौगुना’ झटका प्रेमलता साहू के अनुसार, प्रदेश में लगातार स्मार्ट मीटरों का विरोध हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार महीनों से आम जनता के बिजली बिल तीन से चार गुना तक बढ़कर आ रहे हैं।
“कांग्रेस सरकार के दौरान आम उपभोक्ताओं को ‘हाफ बिजली बिल योजना’ का सीधा लाभ मिल रहा था, जिससे हर वर्ग को बड़ी राहत थी। लेकिन भाजपा सरकार के आते ही इस राहत को समाप्त कर दिया गया और ऊपर से स्मार्ट मीटर थोप दिए गए, जिसने आम जनता का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।”
रसोई तेल की कीमतों में ‘आग’
बिजली बिल के झटके से लोग उबर भी नहीं पाए थे कि पिछले एक महीने के भीतर खाद्य तेलों (सोयाबीन, सरसों, सनफ्लावर) की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रसोई पर असर:
तेल की कीमतें बढ़ने से एक सामान्य परिवार का मासिक रसोई बजट 20% से 30% तक बढ़ गया है।
जीवन यापन में कठिनाई: न्यूनतम आय वाले परिवारों के लिए अब महीने का खर्च चला पाना लगभग असंभव सा होता जा रहा है।
निष्कर्ष:
आम उपभोक्ताओं की मांग है कि स्मार्ट मीटरों की धांधली की जांच की जाए और हाफ बिजली बिल जैसी जनहितकारी योजनाओं को पुनः बहाल कर खाद्य तेलों की कीमतों पर तत्काल नियंत्रण लगाया जाए।