कृषि ऋणमाफी योजना के लाभ को लेकर निजी बैंक शाखाओं पर कथित अनियमितता और पात्र किसानों को योजना से वंचित किए जाने के आरोप सामने आए हैं। प्रभावित किसानों का आरोप है कि वर्ष 2018-19 में एनपीए घोषित कृषि ऋण खातों की स्थिति समान होने के बावजूद कुछ किसानों को ऋणमाफी का पूरा लाभ मिला, जबकि कई अन्य किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए। मामले को लेकर किसानों ने कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

किसानों ने जांच पूरी होने तक उनके खिलाफ ऋण वसूली, कुड़की और भूमि नीलामी जैसी कार्रवाई पर रोक लगाने की भी मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समान परिस्थितियों वाले खातों में अलग-अलग तरीके से ऋणमाफी का लाभ दिया गया है तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
किसान बंधु संगठन के बाबा टेक सिंह चंदेल नेतृत्व में कलेक्टोरेट पहुंचे किसानों ने बताया कि 30 जून को कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में बैंक से जुड़े किसानों के मामलों पर चर्चा की गई थी। किसानों के अनुसार, कलेक्टर के निर्देश पर बैंक ने ऋणमाफी का लाभ प्राप्त करने वाले और इससे वंचित किसानों की बकाया सूची उपलब्ध कराई।

किसानों और संगठन का दावा है कि सूची के मिलान और अवलोकन के दौरान उन्हें कई मामलों में अंतर नजर आया। उनका आरोप है कि वर्ष 2018-19 में एनपीए घोषित कुछ कृषि खातों को बैंक अधिकारियों द्वारा ऋणमाफी के लिए अपात्र बताया जा रहा है, जबकि उसी अवधि में एनपीए घोषित अन्य खाताधारकों को ऋणमाफी अथवा संबंधित छूट का लाभ मिला है।
किसानों का कहना है कि यदि एक ही गांव, समान परिस्थितियों और समान श्रेणी के खातों में अलग-अलग तरीके से योजना का लाभ दिया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रभावित किसानों ने बैंक की नेहरू नगर भिलाई, चरोदा और दुर्ग शाखाओं से जुड़े कृषि ऋणमाफी प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। किसानों ने वर्ष 2018-19 में एनपीए घोषित सभी कृषि ऋण खातों की जानकारी जुटाकर यह जांच करने की मांग की है कि किन नियमों और पात्रता मापदंडों के आधार पर कुछ किसानों को योजना का लाभ मिला और अन्य किसान इससे वंचित रह गए।

जांच तक कुड़की और नीलामी रोकने की मांग
किसानों ने मांग की है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित किसानों के खिलाफ वसूली, कुड़की और भूमि नीलामी की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही बिना किसी वैधानिक कारण के योजना से वंचित रहे पात्र किसानों को नियमानुसार ऋणमाफी अथवा समतुल्य राहत देने की मांग की गई है।
इसके अलावा बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची का सक्षम अधिकारी से धरातलीय सत्यापन कराने की मांग भी रखी गई है। किसानों ने प्राकृतिक आपदा, फसल नुकसान और आर्थिक संकट को देखते हुए बकाया कृषि ऋण पर ब्याज और दंडात्मक शुल्क में राहत देने का भी आग्रह किया है।
किसानों ने यह भी कहा है कि यदि जांच में बैंक अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

