कभी हिंसा की राह पर भटके युवाओं के हाथ अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखेंगे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पुनर्वास और कौशल विकास की दिशा में सुकमा जिले में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 25 आत्मसमर्पित युवाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सुकमा और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 15 दिवसीय कौशल विकास प्रशिक्षण में युवाओं को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने धान के पैरा की तैयारी, स्पॉन (बीज) का उपयोग, पॉलीबैग तैयार करने, नमी प्रबंधन, फसल की तुड़ाई, पैकेजिंग और बाजार में बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया सिखाई। ताकि प्रशिक्षण के बाद युवा स्वयं अपना मशरूम उत्पादन व्यवसाय शुरू कर सकें।


विशेषज्ञों ने बताया कि मशरूम उत्पादन कम लागत, कम जगह और कम समय में शुरू होने वाला लाभकारी व्यवसाय है। ग्रामीण और वन क्षेत्रों में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों के जरिए इसे आसानी से अपनाया जा सकता है, जिससे हर महीने नियमित आय अर्जित की जा सकती है।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि मशरूम प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी और कई आवश्यक खनिजों से भरपूर पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे यह स्वरोजगार का एक सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बन गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रम केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आत्मसमर्पित युवाओं को सम्मानजनक जीवन, आत्मविश्वास और समाज में नई पहचान दिलाने का माध्यम भी बन रहे हैं।

