बरसते पानी में पूरी रात सड़क पर डटे अतिथि शिक्षक, बोले— ‘नियमीकरण या फिर इस्तीफा’
दुर्ग। अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों ने सोमवार को अपने आंदोलन को और तेज कर दिया। दोपहर में रैली निकालते हुए बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष अतिथि शिक्षक शिक्षा मंत्री के सेवा सदन कार्यालय पहुंचे और कार्यालय के सामने सड़क पर धरने पर बैठ गए। लगातार बारिश के बावजूद शिक्षकों ने पूरी रात सड़क पर बिताई। कई शिक्षक अपने छोटे बच्चों के साथ धरने में शामिल रहे। आंदोलनकारियों का कहना था कि अब उनकी लड़ाई आर-पार की है और “या तो नियमीकरण होगा या फिर नौकरी से इस्तीफा देंगे।”

अतिथि शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए कहा कि वर्षों से अपनी समस्याओं से शासन को अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि 20 हजार रुपये के मानदेय में परिवार का पालन-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी खर्च उठाना बेहद कठिन हो गया है।

शिक्षकों ने बताया कि नियमित शिक्षकों के समान कार्य करने के बावजूद उन्हें काफी कम मानदेय मिलता है। जहां अन्य शिक्षकों का वेतन 40 से 50 हजार रुपये तक है, वहीं अतिथि शिक्षकों को मात्र 20 हजार रुपये मिलते हैं। इतना ही नहीं, ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान दो माह का मानदेय भी नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि वे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में जाकर बच्चों को शिक्षा देने का कार्य कर रहे हैं, फिर भी उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।


मंगलवार सुबह से लगातार हो रही बारिश के बावजूद अतिथि शिक्षक सेवा सदन के सामने डटे रहे। दोपहर में तेज बारिश होने पर भी आंदोलन जारी रहा। इसके बाद जिला प्रशासन के अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से चर्चा की और बताया कि उनके प्रतिनिधिमंडल की शिक्षा सचिव से रायपुर में बैठक तय हो गई है। प्रशासन के आग्रह पर अतिथि शिक्षकों ने प्रतिनिधिमंडल को रायपुर भेजने का निर्णय लिया और सेवा सदन के सामने चल रहा धरना फिलहाल स्थगित कर दिया।


अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा सचिव के साथ होने वाली बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन समाप्त नहीं होगा बल्कि और अधिक उग्र रूप में जारी रहेगा। अब सभी की निगाहें रायपुर में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सरकार अतिथि शिक्षकों की मांगों पर क्या फैसला लेती है।
